राष्टीय एकता के दोहे

शक्कर पानी ज्यों घुले, ऐसे घुलमिल देश
शर्बत पी लें शांति का, यह भारत संदेश
भारत है एक बाग सा, कई प्रजाति के फूल
औ माली भगवान् हैं, सींच रखे अनुकूल
भाषाए होंगी अलग, होंगे अलग विचार
क्रिस्मस होली ईद सब, भारत मां त्योहार
भारत महिमा गा गए, स्वामी विवेकानंद
भारत महिमा को सुना, विश्व हुआ मुख बंद

Comments

3 responses to “राष्टीय एकता के दोहे”

  1. Geeta kumari

    बहुत खूब अति सुंदर पंक्तियां

  2. राष्ट्रीय एकता पर बहुत ही प्यारी पंक्तियां लिखी हैं आपने

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