7 Comments

  1. अति सुन्दर रचना है आपकी।
    “सरकार या शासन प्रणाली को
    दोष देकर कुछ नहीं होगा,
    हमें ही आगे आना होगा।
    अपने स्वार्थों को तज कर
    समाज हित में बढ़कर
    कुछ अलग कुछ नया करना होगा।”

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