कुल्हाड़ी मत चलाना

कहा पेड़ ने मानव से
कुल्हाड़ी मत चलाना
मैं तुम्हारा पांव हूँ
जब जाओगे मझधार में
मैं तुम्हारी नाव हूं
बचोगे तुम भी नहीं मुझे मारकर
मैं तुम्हारी छाँव हूं
प्यासे मर जाओगे
मै बदलो को लुभाने वाला t
ठाव हूं
मर जाओगे प्रदूषण से
मै तुम्हारी आखरी
दाँव हूं
मुझे पालो काल से बचाउंगा
मै तुम्हारा प्यारा गाँव हूं
कुल्हाड़ी मत चलाना
मैं तुम्हारा
शुकून, सुख, शांति, समृद्धि से
भरने वाला घाव हूं
कुल्हाड़ी मत चलाना

Comments

2 responses to “कुल्हाड़ी मत चलाना”

  1. बहुत ही सुंदर

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