झूठ की फसल बोई और सच की तलाश जारी है
अत्याचार की आज कल की दुनिया पुजारी है
उठाता नहीं कोई जुल्म के विरुद्ध आवाज
अविश्वास के इस दौर में जीने की लाचारी है
इस दौर में
Comments
4 responses to “इस दौर में”
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अतिसुंदर
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सुंदर अभिव्यक्ति
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वाह क्या बात है
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Great
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