इस दौर में

झूठ की फसल बोई और सच की तलाश जारी है
अत्याचार की आज कल की दुनिया पुजारी है
उठाता नहीं कोई जुल्म के विरुद्ध आवाज
अविश्वास के इस दौर में जीने की लाचारी है

Comments

4 responses to “इस दौर में”

  1. Ekta Gupta

    सुंदर अभिव्यक्ति

  2. वाह क्या बात है

  3. vikash kumar

    Great

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