अर्धागिंनी बन जाऊंगी

जरा- सा वक्त लगेगा
तुमको समझने में, जान पाने में
पर जब तक दिलों के बीच
दूरियां हैं तब तक
नजदीक ना आना…

जब तुम्हारी सांसों की खुशबू
मेरा मन भिगाएगी,
तुम्हारी रूह की गर्मी
मेरे तन को तपाएगी
तब तुम्हें अपनी निगाहों में
छुपाऊंगी,
तब तुम्हें परमेश्वर बना,
अर्धांगिनी बन जाऊंगी….

Comments

4 responses to “अर्धागिंनी बन जाऊंगी”

  1. Amita Gupta

    बहुत सुंदर रचना

  2. Ekta Gupta

    बहुत सुंदर अभिव्यक्ति

  3. vikash kumar

    Great

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