6 Comments

  1. मानवता निष्प्राण पड़ी है
    कितने दुख की घड़ी है
    लोग देख रहे हैं बनकर तमाशा
    भीड़ तो बस तमाशा बनकर खड़ी है..
    बहुत मार्मिक अभिव्यक्ति

  2. मेरी आत्मा सिसक रही है मानवता निष्प्राण पड़ी है,
    बहुत ही मार्मिक अभिव्यक्ति

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