“भारतीय संस्कृति”

भारतीय संस्कृति,
अमिट
अडिग
अति सुन्दर
मनभावन,
स्वीकृत भावों की
भंगिमा है
जिसे अपनाया
सहेजा
संवारा और
ह्रदय तल से
स्वीकृत किया जाता है
जो सदा सबका
हित
लिये रहती है और
संस्कारों की धरोहर
हर मनुष्य को देती है
जिससे सुदृढ़ होता है,
मन
वचन
कर्म
व्यक्तित्व,
जो समयानुसार
परिवर्तित भी होती है
अपने अन्दर
सर्व धर्म समभाव
की भावना लिये रहती है।।

Comments

7 responses to ““भारतीय संस्कृति””

  1. Amita

    भारतीय संस्कृति में जो आत्मीयता है वह और कहां,
    श्लाघनीय रचना

    1. Pragya

      इतनी सुंदर समीक्षा के लिए धन्यवाद कहने हेतु मेरे पास शब्द नहीं है अमिता जी

  2. Ekta

    भारतीय संस्कृति पर उत्कृष्ट रचना

    1. Pragya

      बहुत-बहुत धन्यवाद एकता

    1. Pragya

      आपका बहुत-बहुत धन्यवाद शास्त्री जी

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