4 Comments

  1. लेखनी को विराम देने की आवश्यकता नहीं है,
    मिलती हमें सुंदर समीक्षा,और मिलती आलोचना भी यहीं है।

  2. बहुत बहुत सुंदर रचना प्रज्ञा जी आपकी कविता पढ़ कर के मैं निशब्द हो गया हूं अत्यंत सुंदर भाव समेटे हुए रचनाकार को यह प्रेरित करता है की नित उत्तम चीजें लिखिए जिसे देश समाज पढ़ें और अपना उत्थान करें

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