उपकार

धरती से आकाश तक, होती जय जय कार
मानव तन जो पाय कर, करता है उपकार
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करते जो उपकार है, उनके है भगवान्
बदल नहीं सकते कभी, बदल जाय इंसान

Comments

2 responses to “उपकार”

  1. बहुत सुंदर 

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