दान-धरम में खर्च

बिल्कुल देर न कीजिये,
भले काम में आप।
होता जायेगा भला,
खुद का अपने आप।।
गणना करते ही रहा,
पूँजी की दिन-रात।
उम्र बिता दी धन कमा,
समझ न आई बात।।
यहीं रह गया सब जमा
जान न पाया राज।
जाना है सबको भले
जाये कल या आज।।
थोड़ा सा हो जाय गर
दान-धरम में खर्च,
उत्तम है यह कार्य तुम
करो कहीं भी सर्च।

Comments

6 responses to “दान-धरम में खर्च”

  1. वाह वाह क्या बात है अतिसुंदर रचना 

    1. सादर धन्यवाद शास्त्री जी

  2. Rishi Kumar

    विचारणीय पंक्तियाँ
    सरल शब्दों में अत्यंत सुंदर भाव
    मजा आ गया 😊

    1. बहुत बहुत धन्यवाद

  3. कवि सतीश जी द्वारा रचित अति उत्तम रचना , गागर में सागर भर दिया है कवि ने…. बहुत  खूब

  4. बहुत सुंदर रचना

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