अपना अपना काम यदि
कर लें सब ईमान से,
देश सोने की चिड़िया
होगा फिर ईमान से।
पूरा नहीं जरा सा भी
यदि दायित्व समझ लें सब
देश सोने की चिड़िया,
होगा फिर ईमान से।
कथनी करनी में अंतर
मिट जाये जब हम सब में,
देश सोने की चिड़िया
होगा फिर ईमान से।
अपना अपना काम यदि
कर लें सब ईमान से,
देश सोने की चिड़िया
होगा फिर ईमान से।
पूरा नहीं जरा सा भी
यदि दायित्व समझ लें सब
देश सोने की चिड़िया,
होगा फिर ईमान से।
कथनी करनी में अंतर
मिट जाये जब हम सब में,
देश सोने की चिड़िया
होगा फिर ईमान से।
देशभक्ति और ईमानदारी से परिपूर्ण कवि सतीश जी की अत्युत्तम रचना, उम्दा लेखन
very nice sir
वाह बहुत खूब
बिल्कुल सही कहा है आपने।
पर हमारी आदत है बस कमी निकालने की, सरकार को कोसने की तथा हाथ पर हाथ धर बैठे रहने की।
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