देश सोने की चिड़िया

अपना अपना काम यदि
कर लें सब ईमान से,
देश सोने की चिड़िया
होगा फिर ईमान से।

पूरा नहीं जरा सा भी
यदि दायित्व समझ लें सब
देश सोने की चिड़िया,
होगा फिर ईमान से।

कथनी करनी में अंतर
मिट जाये जब हम सब में,
देश सोने की चिड़िया
होगा फिर ईमान से।

Comments

4 responses to “देश सोने की चिड़िया”

  1. देशभक्ति और ईमानदारी से परिपूर्ण कवि सतीश जी की अत्युत्तम रचना, उम्दा लेखन

  2. Neha Avatar
    Neha

    very nice sir

  3. बिल्कुल सही कहा है आपने।
    पर हमारी आदत है बस कमी निकालने की, सरकार को कोसने की तथा हाथ पर हाथ धर बैठे रहने की।

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