जीन्स पहनी शर्ट घौंसी
जिस्म नहला लिया इत्र से
आईने में देखा मुस्कुराहट ने कहा
अभी जवान हूँ भोले, किसी से कम हैं के
बाहर आये तो लगा अब कुछ होगा
जमाना बहुत पीछे रह गया होगा
निगाह सब पर फिराई नापा तोला
अपनी तोंद देखी काश कहीं से कम हो सके
कुछ आज गए कुछ कल कुछ पहले ही कम थे
हाय मेरे रेशमी बाल, मेरे हाथों के सनम थे
सोचा कई बार झूठे बालों का सहारा ले लें पर फिर
बिल्कुल नही करेंगे, जाने दो बेबफा सनम थे
बड़े शर्मीले थे शर्माजी हम अपने लड़कपन में
झुरझुरी छूट जाती थी, कोई गुजरी, तो बदन में
उम्र बढ़ती गई मेरी खामियों के साथ साथ ऐसे
गया सब जैसे खुशफहमी नही हो, मेरे वहम थे
खैर चलो जो हुआ अच्छा हुआ, रहमत तेरी
लाख कमियां है पर खुशियां भी कितनी दी, नेमत तेरी
किसी को पसंद नही तो भी मैं पहली पसंद हूँ अपनी
क्या चौदह सितम होंगे मेरी चार खुशियों से बढ़ के
प्रवीनशर्मा
मौलिक स्वरचित रचना
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