नाम है अनेक तेरे कण कण मे आप हो देखना बस एक झलक, सांसो में आलाप हो मैं कलंकित शंकित हूँ जरा, गंगाधर आप हो मन से मेरे भवभय हरो, हर हर विश्वनाथ ओ। सभी […]
नाम है अनेक तेरे कण कण मे आप हो देखना बस एक झलक, सांसो में आलाप हो मैं कलंकित शंकित हूँ जरा, गंगाधर आप हो मन से मेरे भवभय हरो, हर हर विश्वनाथ ओ। सभी […]
सैंया तेरे साथ खेल को लाई चुनरिया कोरी मैं कौन रंग के साथ रंगोगे, मोहे अबकी होरी में जीवन मिला तोहे पाने को,कितने मौसम बीत गए इंतजार में तेरे प्रीतम नैना मेरे भीग गए अबकी […]
साल गुजरता अलविदा कर ही गया। यादों को उम्मीदों से जुदा कर ही गया। उम्मीदें उतर आई शाम के परिंदों सी, पर पुराना होकर भी कुछ नया सिखाकर ही गया। जीने के कुछ और पैंतरे […]
बात छोटी सी है, मगर मुश्किल बड़ी है, बहू बेटी दोनों बराबर, किस अंतर से छोटी बड़ी है। दोनों इज्जत ही तो है अपने घराने की, जिद सी क्यों है अहम दिखाने की। ये बात […]
मुक्त आकाश में उड़ते स्वछंद पंछी आह स्वाद आ गया कहकर, वाह क्या जिंदगी कोई मुंडेर, कोई दीवार, या कोई सरहद देश की सब अपने परों की हद में, वाह कैसी खुशी बसेरा रख लिया,जब […]
ढलता अंधेरा और काली सी महिला बाजार किनारे खड़ी, हाथों में थैला अजनवी थी मगर कुछ अलग था चेहरे में जैसे खुशी खड़ी हो उदासी के पहरे में बढ़ने लगा तो आवाज आई कहाँ तक […]
देखकर मुस्कुराते भी नही क्या इतना बुरा हो गया हूं मैं हर बार आप-आप कहती हो सच्ची, इतना बड़ा हो गया हूं मैं बचपन मे तो छोटी रजाई इतनी लंबी बातें थी तेरी अपने पैरों […]
जीन्स पहनी शर्ट घौंसी जिस्म नहला लिया इत्र से आईने में देखा मुस्कुराहट ने कहा अभी जवान हूँ भोले, किसी से कम हैं के बाहर आये तो लगा अब कुछ होगा जमाना बहुत पीछे रह […]
जिनके बिना मेरा नाम अधूरा जिनके साथ मेरा परिवार पूरा वो छत है बाकी सब दीवारें है एक उन्होंने पूरे घर के सपने सँवारे है वो माँ से कम दिखते है घर मे कितना कुछ […]
सती और शिव संबाद प्रथम मिलन पर माना तुमने मुझसे प्रेम किया प्रेम ने मेरा भी मन छू लिया एक फ़क़ीर हूँ मैं, जानती हो ना तुम्हारा क्या भविष्य हुआ मेरे साथ बस धुआं ही […]
जब तक मैं कंवारा था मजाक और झूठ का अंतर नही समझ पाया अब जानता हूँ सच तो लोग खुद से भी नही बोल पाते जब तक मैं कंवारा था किसी को दर्द में देख […]
एक छत है मगर अलग अलग कमरे है कही गम कही खुशी कही बेखबरी सभी अलग अलग चेहरे है कोई नही जानता रात किसकी कैसी थी कही हल्के कही गहरे काले घेरे है उसकी इजाजत […]
प्रिय भैया लिवा ले जाओ न आकर तुम्हारी याद आती है यहाँ खुश हूं बहुत लेकिन मुझे खुशियां रुलाती है जबसे आई हूं रोती हु कमरा बंद कर करके कोई आता है तो होंठो में […]
इन घड़ी वालों के पास वक़्त कहाँ है इनकी बातों में वो बात अब कहाँ है जिंदगी आसान करने के फंडे ढूंढते ढूंढते छप्पर तो अभी भी है, उठवाने वाले हाथ कहाँ है। इस अंधी […]
अब आ ही गए हो तुम तो दुश्मन की जरूरत ना रहेगी बैठे बैठे बहुत वक़्त गुजर गया लगता है अब फुरसत ना रहेगी नाम तुम्हारा भी सुना था बड़ा देखने की हसरत अधूरी ना […]
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