कुमाऊनी कविता: धन्न्न पैसा त्यर कमाल

धन्न्न पैसा त्यर कमाल
कस्स्ये बतूं त्यर हाल
जों ले जांछे वों बबाल
धन्न्न पैसा त्यर कमाल

जब ऊंछे तू देश बटी
तू भले क्वे जिन भैटे
त्वै के हाल्छया सब अंग्वाल
धन्न्न पैसा त्यर कमाल

त्वै है ठुला झुकी रूछ्या
बाट-घाटा में रुकी रूछ्या
त्यर सामान कान में ल्याल
धन्न्न पैसा त्यर कमाल

घमंड में तू चूर रुंछे
आफ जैसो क्वे ना देखछै
त्यर बौल्याट कुछै साल
धन्न्न पैसा त्यर कमाल

जै लै त्वैके धर्मे ल कमा
तू लै हुंछै वांई जमा
उ घरा का बडिया हाल
धन्न्न पैसा त्यर कमाल

Comments

2 responses to “कुमाऊनी कविता: धन्न्न पैसा त्यर कमाल”

  1. सुन्दर रचना

  2. सुंदर कविता सुंदर शब्दावली

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