जब तुम नहीं होती तो ये सब होता है नींद रूठ जाती है खिड़की के परदे मुंह फेर लेते हैं बिस्तर की चादर भी बूढ़ी दिखने लगती है चेहरे पर सिलवटों से घिरी हुई दादी […]

देखो श्राद्ध आ गए स्वर्ग लोक से पितृ देख रहे अपने पुत्रों को देखो श्राद्ध आ गए हंस रहे अपनी ही परंपराओं पर सोच रहे काश जीते जी भी कोई क्रिया या करम होता तो […]

क्या वो मेरा पहला प्यार था जब तुम्हारा स्पर्श इस दिल की धड़कनों को चेतक बना देता था या तुम्हारी लटों का उड़ कर बार बार मेरे चेहरे पे आना मुझे बेसुध कर जाना छण […]

जब इस आसमां में नया तारा जन्म लेता होगा तो क्या होता होगा? क्या उसे कोई सैर कराता होगा? या अकेले ही उन्मुक्त मड़राता होगा कोई दिल तोड़ता होगा उसका या वो खुद ही टूट […]

ठहराव ठीक नहीं फिर वो जीवन का हो या पानी का मुझे दादाजी ने सिखाया था बूढ़े सागर ने जवां नदियों को समझाया है ठहराव ठीक नहीं फिर वो नया सीखने की ललक का हो […]

-सत्य घटना पर आधारित काव्य- एक नन्ही मेहमान आई है मेरे घर मैना आई है जब अकेले थी तो पेड़ की डाल में रह लेती थी अब मां बनने वाली है तो जिम्मेदारी भी आई […]

यह समय बड़ा बलवान है समय पर लिखना कितना आसान है पर समझ पाना मुश्किल जितना उलझो इसे समझने में उतना ही जटिल किसी के लिए हाथों से फिसलती रेत तो किसी के लिए बेवफा […]

दुनियां कितनी बदल जाए अगर इंसानों की तरह प्रकृति में भी प्रतिस्पर्धा हो जाए घोसले की जगह चिड़ियों की भी अट्टालिकाएं बन जाए फूलों में सुंदरता को लेकर प्रतियोगिताएं हो जाए वृक्ष भी अपने फलों […]

तुम्हारे खूबसूरत चेहरे पे जो गुस्सा रहता है जैसे हर गुलाब की हिफाजत में कांटा रहता है जंगल में किसी कस्तूरी हिरन सी लगती होगी जब अपने पायल की खनक से तुम खुद डर जाती […]

अजीब इत्तिफाक था याद है…… छत पे हमारा चोरी छिपे मिलना तुम्हारे पिताजी के आते ही बिजली का चले जाना अजीब इत्तिफाक था एक छतरी में कॉलेज से घर आना तुम्हारा गले मिलने का मन […]

ये उत्तराखण्ड है हिमालय की गोद में उत्तर का एक अखंड प्रदेश पहाड़ों के बीच खड़ा एक दुखों का पहाड़ लिए कुछ आपदा का शिकार कुछ राजनीति का जन्म एक बार नामकरण दो बार अजीब […]

*यह कविता एक ऐसे व्यक्ति पर आधारित है जो की अपनी मृत्यु के पश्चात अपनी व्यथा सुना रहा है* मैं अब दुबारा जीना नहीं चाहता जब जिंदा था तब कौन सा जीने दिया तुमने अब […]

मुझे यह बताते हुए हर्ष होता है की यह कविता मेरी पहली कविता थी जो मैंने दिनांक 22-11-2010 को लिखी थी आशा करता हूं कि आप सब लोगों को भी यह पसंद आएगी । जब […]

जब तुम थे मिले बहार आ गई थी जिंदगी में सुबह की पहली किरण भी हमसे मिलकर जाती थी पंछी हमें देख गाते थे झरने हमें देख झरते थे अपने अलग अंदाज में क्योंकि, तब […]

तुम्हारी बेवक्त आने की आदत एक दिन मुझे खो देगी इंतजार करते करते चला गया तो तुम रो दोगी अभी सावन है आ जाओ सितंबर के बाद ये बरसात न होगी मैं शहर चला जाऊंगा […]

बस इतनी सी ख्वाइश है जैसे आज मिले हो, हर बार यूं ही मुस्कुरा कर मिलोगे क्या दौलत शोहरत ज्यादा मिले ना मिले एक ही घर में मां पिताजी के साथ रहोगे क्या ये गुलाब […]

बीते सुनहरे पल तब क्यों याद आते हैं जब बैठो अकेले यादों की दरिया के किनारे यादों की एक लहर सी आती है सुर्ख दिल की सुर्ख रेत को गीला कर देती है दिल आज […]

पलकों में अटके हैं वो उसकी याद की तरह आज फिर तन्हा हैं हम तारों से घिरे चाँद की तरह रो अगर जाएं तो यादें बह जाएं अंजुली में भर लो इन्हें बस एक प्यास […]

रावण अभी जिंदा है अमृत सुखा के नाभी का रावण कहाँ मर पाया है वापस अयोध्या लौटे तो फिर से जिंदा पाया है पहले लंका में रहता था अब प्रजा के मन में पाया है […]

बूढ़ी थकी सी पलकों में पल रही वो उम्मीद का जग जाना उनके लिए पर्व का महापर्व बन जाना वो दिवाली में मेरा घर आना पुराने पर्दों का एकाएक नया हो जाना धूल खा रही […]

माँ का प्यार है बड़ा निराला मिले उसे जो किस्मत वाला माँ ममता करुणामय सागर धन्य हुआ जग तुझको पाकर वेद पुराणों की गाथा में तुझे मैं देखूं गौ माता में गंगा में भी तेरा […]

जब प्यास से व्याकुल होकर धरती चिल्लाती है चट्टानें भी रो पड़ती हैं अपनी आंखों से झरना बहा देती हैं तब लगता है पत्थर भी पिघलता है मां जब बेटी की विदाई के बाद दीवार […]

धन्न्न पैसा त्यर कमाल कस्स्ये बतूं त्यर हाल जों ले जांछे वों बबाल धन्न्न पैसा त्यर कमाल जब ऊंछे तू देश बटी तू भले क्वे जिन भैटे त्वै के हाल्छया सब अंग्वाल धन्न्न पैसा त्यर […]

पियक्कड़ों के शहर में शरबत ढूंढ रहा हूं खारे सागरों से मीठा पानी पुकारता रहा हूं अपने हाथों से अंजुली भर के पानी पिलाती हो मुझे मैं वही छोटा सा तालाब अपने घर रोज चाहता […]

तुम नमकीन थी मैं चाय था दोनो एक प्लेट में आकर मिलते थे वहीं से हमारी गुड मॉर्निंग शुरू होती थी बगल वाली प्लेट के बिस्कुट हमें देख जलते थे, इतना जलते थे कि वहीं […]

आज एक नयी धुन लगी मेरे मोबाइल को बोला आज याद आ रही है चिट्ठी अम्मा की मिलने की जिद पकड कर के निकला पडा जेब से तड़के चल पड़ा किसी पुराने कमरे की ओर […]

तेरे एक इशारे पे जो तू चाहे मैं वो ले आता तेरे जीवन के अंधेरे मिटाने को सौ जुगनुओ से उजाला चुरा ले आता तेरे बंजर पड़े खेतों में अपनी आँखों से बरसात करा देता […]