4 Comments

  1. दर्द की बन जाऍं दवा,
    हो उन पर अभिमान
    उन्हें हम दोस्त कहते हैं ज़िन्दगी में..
    मिलते हैं कुछ फ़रिश्ते ज़िन्दगी में॥
    —- लेखनी में अदभुत कवित्त्व क्षमता है। भाव व शिल्प दोनों संतुलित हैं।

    1. कविता की इतनी सुंदर और उत्साहवर्धक समीक्षा हेतु आपका बहुत-बहुत धन्यवाद सतीश जी, अभिवादन 🙏

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