वृक्ष हैं कुदरत का वरदान,
इन्हें क्यों काट रहा इन्सान।
वृक्ष होंगे तो होगी हरियाली,
वसुंधरा पर होगी खुशहाली।
नियत समय पर वर्षा आएगी,
सूखी धरती भी अन्न उपजाएगी।
वृक्ष देते औषधि, फल और फूल,
धारण करें धरा की धूल।
वृक्ष बनाऍं पर्यावरण का संतुलन,
अति आवश्यक है इनका संवर्द्धन॥
_____✍गीता
वृक्ष हैं कुदरत का वरदान

Comments
4 responses to “वृक्ष हैं कुदरत का वरदान”
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पर्यावरण है तो हम हैं
वृक्ष की उपयोगिता में सुन्दर कविता-
आभार रोहित जी
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वृक्ष हैं कुदरत का वरदान….
वृक्षों की महत्ता को स्पष्ट करती हुई बहुत ही सुंदर रचना प्रस्तुति👌👌-
बहुत बहुत धन्यवाद अमिता
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