कहाँ से देगा

जो सावन में भी न मिल पाया
वो ये माह कहां से देगा

इस महीने का तो नाम ही “सितम-बर” है
ये रहम कहां से देगा

मेरा हकीम तो खुद बीमार है
वो मरहम कहां से देगा

“तुम भी मुझसे प्यार करते हो”
इतना सुकूं कोई और वहम कहां से देगा

Comments

2 responses to “कहाँ से देगा”

  1. सुन्दर रचना 

    1. आभार प्रज्ञा जी

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