एक कवि हो कर
एक कवि का दर्द कहां समझते हो, प्यार करते हो मुझसे पर
मुझको कहां समझते हो ?
नींद में लेते हो तुम किसी और का नाम….!
बेवफा तो नहीं पर
वफादार भी नहीं लगते हो।
बेवफा तो नहीं…
Comments
2 responses to “बेवफा तो नहीं…”
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Wah bahut sundar
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Thanks
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