मेरी कलम

नहीं सम्भल पाये हम
ना जुल्फों को ही सम्भाला,
मेरी कलम ने इस बीच
कितनों को बेआबरू कर डाला।

Comments

2 responses to “मेरी कलम”

    1. धन्यवाद 

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