क्या बात है कुछ बीते लम्हों की,
ठहर से गये हैं जीवन में।
बस गये तन मन में मेरे,
जीवन की पूंजी बन कर के।
बचपन की कुछ याद पुरानी,
बस गई बन कर एक कहानी।
यौवन की कुछ याद सुहानी,
कुछ मीठी, कुछ ऑंख में लाई पानी।
मेहनत कर के खाई रोटी,
परिश्रम से ही पाया पानी।
भूले-बिसरे जो पल मेरे,
उन पलों को भी नमन् है।
याद रहे जो पल जीवन के,
उनको मेरा अभिनन्दन है॥
______✍गीता
कुछ कहते हैं बीते पल
Comments
4 responses to “कुछ कहते हैं बीते पल”
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बहुत ही सुंदर भावाभिव्यक्ति दीदी मां*🙏
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धन्यवाद एकता
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बहुत उच्चस्तरीय रचना गीता जी
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समीक्षा हेतु हार्दिक धन्यवाद सतीश जी
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