बारिश की बूंदें

बारिश की बूंदें
सहला गईं प्रकृति का अंग अंग
हरियाईं उपेक्षित शिलाएं
अहिल्या जन्मी
राम जी के पदन्यास से

०८.०२.२०२२

Comments

2 responses to “बारिश की बूंदें”

  1. बहुत सुन्दर

    1. धन्यवाद गीता जी

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