जुनून जिंदा है इस बात का सुकून तो है।
बगैर जुनून के जिंदगी बस जहन्नुम तो है।
सोचो मौसीक़ी न होती, जहान कैसा होता,
शुक्र है कानों में घुलता मधुर तरन्नुम तो है।
क्या सोचेगी, खौफ से खत कभी भेजा नहीं,
हाले-दिल लिख रखा खत में मज़मून तो है।
खुदा न करे तेरी उदासी का कभी सबब बनूं,
जीने का जरिया तेरे लबों की तबस्सुम तो है।
जुगनुओं से ज्यादा जगमग है जो तेरा दामन,
तुम्हारे दामन में सजे अनगिनत अंजुम तो है।
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