मुक्तक 1

मोहब्बत के सवालों से मैं अक्सर अब मुकर जाता ,

कहीं बातो ही बातों में मैं कुछ कहकर ठहर जाता.. 

कि तेरा नाम भूले से जबां तक आ गया ग़र तो,

तू बदनाम हो जाये न इससे मैं सिहर जाता …

    …atr

Comments

6 responses to “मुक्तक 1”

  1. राम नरेशपुरवाला

    Good

  2. राम नरेशपुरवाला

    वाह

  3. Kanchan Dwivedi

    Nice

  4. Satish Pandey

    Waah

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