Abhishek kumar's Posts

है नही आसान

मंज़िल है नही आसान बहुत मशरूफ हैं राहें । जीत जायेगें हम दुनिया दो कदम रोज़ चलकर के। »

है नही आसान

मंज़िल है नहीं आसान । बहुत मशरूफ हैं राहें । जीत जायेंगे हम दुनिया दो कदम रोज़ चलकर के। »

सपनें

सुबह के मीठे सपनों जैसा है तुम्हारा एहसास । रहते हो यूं दिल में जैसे हो साँस । »

अच्छा है

ना मिलने का रोज़ बहाना अच्छा है। यादों से हमको तड़पाना अच्छा है । सोते-सोते आ जाते हो ख्वाबों में हमसे मिलकर आँख चुराना अच्छा है। »

अच्छा है

ना मिलने का रोज़ बहाना अच्छा है। यादों से हमको तड़पाना अच्छा है । सोते-सोते आ जाते हो ख्वाबों में हमसे मिलकर आँख चुराना अच्छा है। »

अच्छा है

ना मिलने का रोज़ बहाना अच्छा है । सोते सोते आ जाते हो ख्वाबों में । हमसे मिलकर आँख चुराना अच्छा है। »

अच्छा है

ना मिलने का रोज़ बहाना अच्छा है । सोते सोते आ जाते हो ख्वाबों में । हमसे मिलकर आँख चुराना अच्छा है। »

चुन लो

चुन लो तुमको जो चुनना है। मुझे हर फ़ैसला मंज़ूर है। तुम्हारी दोस्ती भी तुम्हारी बेवफाई भी। »

चुन लो

चुन लो तुमको जो चुनना है। मुझे हर फ़ैसला मंज़ूर है। तुम्हारी दोस्ती भी तुम्हारी बेवफाई भी। »

चुन लो

चुन लो तुमको जो चुनना है। मुझे हर फैसला मंज़ूर है। तुम्हारी दोस्ती भी तुम्हारी बेफफ़ाई भी। »

खामोशी

तुम्हारी खामोशी भी क्या चीज़ है ना जाने क्या कह जाती है। जो कहना चाहतें हो नही कहती हजारों फसाने सुनाती है। »

खामोशी

तुम्हारी खामोशी भी क्या चीज़ है ना जाने क्या कह जाती है। जो कहना चाहतें हो नही कहती हजारों फसाने सुनाती है। »

अच्छा है

मंज़िल अब दूर नहीं है सफ़र भी अच्छा है । तुम हो तो सब कुछ अच्छा है। »

अच्छा है

मंज़िल अब दूर नहीं है सफ़र भी अच्छा है । तुम हो तो सब कुछ अच्छा है। »

अच्छा है

मंज़िल अब दूर नहीं है सफ़र भी अच्छा है । तुम हो तो सब कुछ अच्छा है »

मज़ा है

पाने का अपना मज़ा है। खोने का अपना मज़ा है। हँसते तो सब हैं पर रोने का अपना मज़ा है। »

सुना है

सुना है खुदा तुम पर मेहरबां हो गया है एक रोज़ मांगी थी दुआ तुमने हमसे दूर जाने की। »

सुना है

सुना है खुदा तुम पर मेहरबां हो गया है एक रोज़ मांगी थी दुआ तुमने हमसे दूर जाने की। »

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