Author: Abhishek

  • काफ़िला

    धीरे-धीरे बढ़ रहा
    है काफ़िला।
    धीरे-धीरे कम
    हो रहे हैं फासले
    मंज़िल है बस
    कुछ ही दूर।
    तू अपनी हिम्म्मत
    भांप रे।

  • है नही आसान

    मंज़िल है नही
    आसान
    बहुत
    मशरूफ हैं
    राहें ।
    जीत जायेगें
    हम दुनिया
    दो कदम
    रोज़ चलकर के।

  • है नही आसान

    मंज़िल है नहीं
    आसान ।
    बहुत मशरूफ
    हैं राहें ।
    जीत जायेंगे
    हम दुनिया
    दो कदम
    रोज़ चलकर के।

  • सपनें

    सुबह के मीठे सपनों
    जैसा है तुम्हारा
    एहसास ।
    रहते हो यूं
    दिल में
    जैसे हो साँस ।

  • अच्छा है

    ना मिलने का
    रोज़ बहाना
    अच्छा है।
    यादों से हमको
    तड़पाना
    अच्छा है ।
    सोते-सोते आ जाते
    हो ख्वाबों में
    हमसे मिलकर
    आँख चुराना
    अच्छा है।

  • अच्छा है

    ना मिलने का
    रोज़ बहाना
    अच्छा है।
    यादों से हमको
    तड़पाना
    अच्छा है ।
    सोते-सोते आ जाते
    हो ख्वाबों में
    हमसे मिलकर
    आँख चुराना
    अच्छा है।

  • अच्छा है

    ना मिलने का
    रोज़ बहाना
    अच्छा है ।
    सोते सोते आ जाते
    हो ख्वाबों में ।
    हमसे मिलकर
    आँख चुराना
    अच्छा है।

  • अच्छा है

    ना मिलने का
    रोज़ बहाना
    अच्छा है ।
    सोते सोते आ जाते
    हो ख्वाबों में ।
    हमसे मिलकर
    आँख चुराना
    अच्छा है।

  • चुन लो

    चुन लो तुमको
    जो चुनना है।
    मुझे हर फ़ैसला
    मंज़ूर है।
    तुम्हारी दोस्ती भी
    तुम्हारी बेवफाई भी।

  • चुन लो

    चुन लो तुमको
    जो चुनना है।
    मुझे हर फ़ैसला
    मंज़ूर है।
    तुम्हारी दोस्ती भी
    तुम्हारी बेवफाई भी।

  • चुन लो

    चुन लो तुमको जो
    चुनना है।
    मुझे हर फैसला मंज़ूर है।
    तुम्हारी दोस्ती भी
    तुम्हारी बेफफ़ाई भी।

  • खामोशी

    तुम्हारी खामोशी भी
    क्या चीज़ है
    ना जाने क्या कह
    जाती है।
    जो कहना
    चाहतें हो
    नही कहती
    हजारों फसाने सुनाती है।

  • खामोशी

    तुम्हारी खामोशी भी
    क्या चीज़ है
    ना जाने क्या कह
    जाती है।
    जो कहना
    चाहतें हो
    नही कहती
    हजारों फसाने सुनाती है।

  • अच्छा है

    मंज़िल अब दूर नहीं है
    सफ़र भी अच्छा है ।
    तुम हो तो सब
    कुछ अच्छा है।

  • अच्छा है

    मंज़िल अब दूर नहीं है
    सफ़र भी अच्छा है ।
    तुम हो तो सब
    कुछ अच्छा है।

  • अच्छा है

    मंज़िल अब दूर नहीं है
    सफ़र भी अच्छा है ।
    तुम हो तो सब
    कुछ अच्छा है

  • मज़ा है

    पाने का अपना मज़ा
    है।
    खोने का अपना
    मज़ा है।
    हँसते तो सब हैं
    पर रोने का
    अपना मज़ा है।

  • सुना है

    सुना है खुदा तुम
    पर मेहरबां हो गया है
    एक रोज़ मांगी
    थी दुआ तुमने
    हमसे दूर जाने की।

  • सुना है

    सुना है खुदा तुम
    पर मेहरबां हो गया है
    एक रोज़ मांगी
    थी दुआ तुमने
    हमसे दूर जाने की।

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