वो क्या महसूस करेंगे जिनके
दिल में भी दिमाग होता है।
दिल की जगह
रिश्तों में दिमाग ही लगाते हैं ।
Author: Abhishek
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वो क्या
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तुम्हे मालूम है
तुम्हें मालूम है
हमको मानना खूब
आता है ।
तो आखिर ये बताओ
तुम क्यूँ हमसे हमेशा
रूठ जाते हो। -
रंग डालेगे
आपको रंग डालेगे
हाँथ में रंग है
पीला।
पहले सूखा लगायेंगे
भर के पिचकारी में
गीला।
आप जब गुस्से में
आकर के हमपे
तिलमिलओगे
आपका साँवला
मुखड़ा कर देंगे
बैंगनी-नीला। -
होली में
बजे ढोलक बजे नगमे
मचे हुढ़दंग होली में
रंगी धरती रंगा
अम्बर ।
उड़े है रंग होली में
कोई गुब्बारे से खेले
तो कोई मरे पिचकारी
पड़ी हैं पान की छींटे
चढ़े है भंग
होली में । -
दर्द
देकर हमको दर्द वो
सो रहे हैं ।
अपनी-अपनी किस्मत है
वो हँस रहे हैं और
हम रो रहे हैं । -
चलो एक बार
चलो एक बार हम फिर से
दिखावा आज करते हैं
तुम पूंछो के
कैसे हो?
हम कह दें के अच्छे हैं
अब तो रातों में
रोना भी हमको
खूब आता है
बस एक बार
तेरी बेवफाई
याद करते हैं । -
यादें
सब कहते हैं
मिट जाती हैं यादें मगर
हमदम भूले हुये
वो दिन अक्सर
याद आते हैं ।
गुज़रता है इन
गलियों से
कोई गाते हुए
खिड़कियों की
ओट से देखती थी
तुम्हे आते हुये ।
भूले हुए वो दिन… -
जाम
अभी तो जीना सीखा है
मैनें ।
अभी तो चलना
सीखा है
मैने।
मेरा मयखाना
मत बन्द करो
उसकी आँखो
से अभी
तो पीना सीखा है मैनें । -
तेरा शर्माना
सुन्दर है तेरा अफसाना
सुन्दर है तेरा नज़राना
देख- देख कर हमसे
छुपना सुन्दर है
तेरा शर्माना । -
तुम आ जाओ
तुम आ जाओ तो
यूं लगेगा मुझें
जैसे चांद खुद आ
गया हो
ज़मी पे। -
कैसे हैं
उम्मीदों के दरवाज़े पर
आस लगाये
बैठे हैं ।
गुजरोगे
जिन गलियों
से तुम फ़ूल
बिछाए बैठे
हैं।
एक दिन ऐसा भी
आएगा शायद
मेरे जीवन में
तुम हमसे
खुद आकर
पूंछो-और बताओ कैसे हैं । -
नींद
मन से मन का मेल
ना होतो
प्रेम कहानी
कैसी है।
लब से लब
ना टकराये
तो साझेदारी
कैसी है।
तू भी जागे
मै भी जागू
एक दूजे
की चाहत में
रात-रात भर
नींद ना आये
ये बीमारी
कैसी है। -
दिल तोड़ने में
दिल तोड़ने में
माहिर है वो।
हमसे एक शीशा तक
टूटता नहीं।
जाकर सीख लेंगे
तोड़ने का गुर
उन्हें इसके सिवा कुछ
सूझता नहीं। -
अपनी यादों से
अपनी यादों से
कह दो मुझे
आया ना करें
आना है तो
तुम्हें भी
अपने साथ
लाएं
यूंँ रात में
अकेले
आया ना करें। -
हम तुमसे
हम तुमसे लड़ते तो
थे ।
पर प्यार बहुत करते
तो थे।
तुम तो इतना
रूठ गये
हम याद तुम्हें
करते तो थे। -
माना के.
माना के हम तेरे जैसे नही
मगर हम इतनें
बुरे तो नहीं।
दोस्त ना मान
मगर क्या हम
तेरी दुश्मनी के
काबिल भी नहीं । -
आज मिला उत्तर
सपनों में
आनें वाला
हमदम
कैसा हो
हमको मिलने
वाला
दिलबर
कैसा हो
आज मिला
उत्तर जब
उनसे नज़र
मिली
मेरे जीवन का
साथी
बिल्कुल
ऐसा हो -
गुमराह करने वाले
गुमराह करने वाले
खुद ही खो गये।
ख्वाब में मिलेंगे
ये कहतें-कहते
वो खुद ही
सो गए । -
आज दिन भर
आज दिन भर उसका
मैने इन्तज़ार किया।
सोंचा था वो
आयेगा मिलने
गलत थी,
जो उसपर
एतबार किया। -
गुम
बहुत मशहूर है तुम्हारे शहर का शोरगुल।
साहब!कही इसमे तुम हो न जाना गुम।।
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दीदार
बहुत तारीफ़ सुनकर आया हूँ मै तेरे शहर मे…
सुना है दिन मै भी यहाँ चांद का दीदार होता है। -
याद
सूरज की किरणे भी सुबह-सुबह कयामत ढ़ा रही है,
पूछ रही है,कैसे है वो?जिनकी तुम्हे याद आ रही है।
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मुलाकात
बुरा उन्हे कहूँ तो ये बिल्कुल गलत बात होगी…….
शायद मै ही बुरा हूँ तो उनसे मुलाकात क्यो होगी..?
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अफसोस
मुझमे ही रह गई
खामियां
या शायद मेरे
प्यार में
जो तेरी दहलीजें
ना पार कर पाये
किस बात पर
रोयें करे
अफसोस
अब कैसा
हम
कल भी
कल भी
अकेले
थे
हम अब भी
अकेले हैं -
कोरा था कागज
_”कोरा कागज़ था और कुछ बिखरे हुए लफ़्ज़,_
_ज़िक्र तेरा आया तो सारा कागज़ गुलाबी हो गया !!”_
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दास्ता
दांस्ता सुनाऊं और मज़ाक बन जाऊं,
बेहतर है मुस्कुराऊं और खामोश रह जाऊं….!!
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जाड़ा
जब तक नारियल तैल जम न जाये,
युगपुरुष केजरीवाल जी मफलर न बाँधने लगे
और बोरो प्लस का विज्ञापन आना न चालू हो जाये……तब तक मै नही मानता की सर्दी आ गयी!!
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आने दो यारो
छिपे हुये दर्द को आज ताज़ा किया है उसने,
दिल को बहुत बेकरार फिर से किया है उसने।याद उसकी आती है हर पल तो आने दो यारो…
कसम देकर अपनी मजबूर भी तो किया है उसने।। -
मंजर
जरूरत पड़ने पर आज मुकर गये हो तुम,
जमाने की तरह कितना बदल गये हो तुम।दोस्त!ये मंजर भी गुजर जायेंगे किसी तरह से,
पर आज चुप रहकर बहुत दर्द दे गये हो तुम।। -
अक्स मेरा
दोस्तो!वो आईना देखकर अपनी नजरे चुराता होगा।
अक्स मेरा जब उन्हे आँखों मे नजर आता होगा।।
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कहाँ हैं वो
कहां हैं वो किधर
ढूँढू नही मालूम
मुझको
चले आओ उन्हें
आवाज़ देती जा रही
हूं मैं ।
ए खुदा! राह में
उन्हें दो पल
के लिए रोक ले
बनकर हवा
पहलू में
उनके
आ रही हूँ मैं । -
दो इन्सान
दो इन्सान एक हो
जाते हैं ।
हर रिश्ते से
खास हो
जाते हैं ।
नज़रों से दूर
होते हैं पर
दिल के करीब
हो जाते हैं ।
प्रज्ञा शुक्ला -
अपनो से नाराज़
सुबह के सपनें
सच होते हैं
क्या
यूं छोटी छोटी बातों पर
नाराज़ नहीं
होते
अपने से खफ़ा होते हैं क्या?
प्रज्ञा शुक्ला -
तुम ना होतो
तुम ना होतो जीने
की आस किसे है
तुम होतो
धूप की चादर
भी ओढ़ लेंगे
हम।मलमल के
बिस्तर की
आस किसे है। -
चाहत
उनकी चाहत में
जीती जा रही हूँ
मैं
यादों को उनकी दिल में
सींती जा रही हूँ
मैं
प्रज्ञा शुक्ला -
गुज़र रही है
गुज़र रही है
गुज़र जायेगी
ये रात भी
तेरी यादों
में सिमट जायेगी। -
एक दोस्त
ज़िन्दगी बेरंग है
कुछ रंग होने चाहिये
है सफ़र लम्बा बहुत
एक दोस्त होना चाहिए । -
सब रूठे
सब रूठे बैठे हैं हमसे
जाने क्यूँ ,
हमने जबसे तुम्हें
अपना कह दिया। -
जीत गये
हम पीछे रह गये
तुम आगे ही सही
तुमसे हार कर
भी हम जीत गए
हैं देखो। -
तुम हो
तुम्हारी तस्वीर को सीने से
लगा रखा है।
यूं महसूस होता है
की तुम हो। -
कुछ खुशियाँ होती
कितना अच्छा होता
तुम होते और हम होते।
कुछ खुशियाँ होतीं
कुछ गम होते। -
जी लो तुम
हमने किया था एक
वादा तुमसे
याद है या भूल
गये?
कहा था एक दिन
छोड़ जायेगें तुम्हें लो
छोड़ दिया जी लो तुम। -
लो खत्म हो गया
लो खत्म हो
गया मुलाकातों
का सिलसिला,
जो घर आता था
घर भूल गया। -
हार भी स्वीकार
हम जो
चाहें वो कर सकते हैं ।
बस हौंसला बनाकर रखना
चाहिए ।
जरूरी नही
जीत ही हांसिल हो,
हार भी स्वीकार
करनी चाहिए । -
सुनते रहते हो
छुप कर मेरी बातें
सुनते रहते हो।
मेरे सपनो की
रातें चुनते
रहते हो ।
मिलने की
फुर्सत जब तुमको
होती है।
तो मेरी ही
राहें चुनते चुनते
रहते हो। -
ज़िन्दगी
आगे बढ़ने का
नाम है ज़िन्दगी
सफलता ठोकर खाकर
ही मिलती है।
हँसते रहने का
नाम है
ज़िन्दगी । -
हुनर से
बात करने से बात
बनती है ।
मुलाकात
करने से
बात बनती है।
कुछ भी तो नही
है हमारे पास
हमारे हुनर से ही
हर बात बनती है। -
कुछ बातें हैं
कुछ सपनॉ की
बातें है।
कुछ अपनों
की बातें हैं।
अधूरी कुछ
बातें थीं ।
अधूरी कुछ
बातें हैं । -
कुछ बातें हैं
कुछ सपनॉ की
बातें है।
कुछ अपनों
की बातें हैं।
अधूरी कुछ
बातें थीं ।
अधूरी कुछ
बातें हैं -
काफ़िला
धीरे-धीरे बढ़ रहा
है काफ़िला।
धीरे-धीरे कम
हो रहे हैं फासले
मंज़िल है बस
कुछ ही दूर।
तू अपनी हिम्म्मत
भांप रे।