Author: Ankit Bhadouria

  • दुनियाँ बदल रही है !!

    ये दुनियाँ बदल रही है, या बस हम बदल रहे हैं ;
    दौड़ बची है पैसों की, सब, सबसे आगे निकल रहे हैं !

    यारियाँ है मतलब की, फर्ज अब हक़ में बदल रहे हैं ;
    रिश्तों में विश्वाश अब कहाँ, यक़ीन अब शक़ में बदल रहे हैं !

    माँ, बहनें महफूज़ नहीं, रक्षक अब भक्षक में बदल रहे हैं ;
    जिनके कदमो में हैं राम-ओ-रहीम, उनको पैरों से कुचल रहे हैं !

    हर चेहरे पर इक नकाब है ‘अक्स’, और लफ्जों में सियासत;
    हर शख्स खुदी में ख़ुदा है, इंसान मजहब में बदल रहे हैं !………#अक्स

  • क्या होगा. . . . . .❤

    क्या होगा. . . . . .❤

    कभी सोचा है, कि जब तुझको, मेरी याद आई तो क्या होगा;

    ना हम होंगे, ना तुम होगे, और ना तन्हाई तो क्या होगा !

     

    कि आकर लफ्ज़ होठों तक, पलट जायेंगे मुमकिन है;

    किसी से कह दिया, और हो गयी, रुस्वाई तो क्या होगा!

     

    करोगे जज़्ब कैसे तुम, जो कहना ना हुआ मुमकिन;

    ख़ुशी की महफ़िलों में आँख, भर आई तो क्या होगा!

     

    ये माना जीतने का हुनर है, तुम्हारे पास मोहब्बत में;

    पर सोंचते हैं, गर किसी से, शिकश्त पायी तो क्या होगा!

     

    रखो बेशक हमारी खामियों का, गुनाहों-सा तुम हिसाब;

    कभी सोंचा है, जब तुम्हारी, ज़फाएँ सामने आयीं तो क्या होगा!!. . . . . #अक्स

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