जब छूटेंगे हम तीरों से

कितने भी जुल्म तुम कर लो,
बांध दो कितनी ही जंजीरो से
मिटा देंगे तेरी हस्ती पल भर में
जब छूटेंगे हम तीरों से

Comments

7 responses to “जब छूटेंगे हम तीरों से”

  1. Ajay Amitabh Suman Avatar

    छोटी पर अच्छी रचना

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