पता नहीं तुम कैसे लिख लेते हो
कविता, इतनी आसानी से
मेरे तो ख्याल ही गुल रहते है
ठहरते ही नहीं कागज पर
पता नहीं तुम कैसे
Comments
14 responses to “पता नहीं तुम कैसे”
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Great
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thanks
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उम्दा
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thanks
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सुन्दर अभिव्यक्ति
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सुन्दर
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Nice 👏
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Nice👌
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सुन्दर
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Nice
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अरबी से उत्पन्न शब्द ‘ख्याल’ के साथ ‘देशज ‘ गुल’ का प्रयोग बहुत ही सुंदरता के साथ किया गया है। वाह
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Very nice Anjali ji
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👌
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Nice lines
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