Archana Verma, Author at Saavan's Posts

अजूबी बचपन

आज दिल फिर बच्चा होना चाहता है बचपन की अजूबी कहानियों में खोना चाहता है जीनी जो अलादिन की हर ख्वाहिश मिनटों में पूरी कर देता था, उसे फिर क्या हुक्म मेरे आका कहते देखना चाहता है आज दिल फिर बच्चा होना चाहता है मोगली जो जंगल में बघीरा और बल्लू के साथ हँसता खेलता था उसे फिर शेरखान को पछाड़ते देखना चाहता है आज दिल फिर बच्चा होना चाहता है हातिम जो पत्थर को इंसान बनाने कालीन पर बैठ उड़ जाता था उसे फिर कोई ... »

मृत टहनियाँ

वो टहनियाँ जो हरे भरे पेड़ों से लगे हो कर भी सूखी रह जाती है जिनपे न बौर आती है न पात आती है आज उन मृत टहनियों को उस पेड़ से अलग कर दिया मैंने… हरे पेड़ से लिपटे हो कर भी वो सूखे जा रही थी और इसी कुंठा में उस पेड़ को ही कीट बन खाए जा रही थी वो पेड़ जो उस टहनी को जीवत रखने में अपना अस्तित्व खोये जा रहा था ऊपर से खुश दिखता था पर अन्दर उसे कुछ होए जा रहा था टहनी उस पेड़ की मनोदशा को कभी समझ न पायी अपनी चिं... »

आज की नारी

मैं आज की नारी हूँ न अबला न बेचारी हूँ कोई विशिष्ठ स्थान न मिले चलता है फिर भी आत्म सम्मान बना रहा ये कामना दिल रखता है न ही खेला कभी women कार्ड मुश्किलें आयी हो चाहे हज़ार फिर भी कोई मेरी आवाज़ में आवाज़ मिलाये तो अच्छा लगता है हूँ अपने आप में सक्षम चाँद तारे खुद हासिल कर लूं रखूँ इतनी दम फिर भी कोई हाथ बँटाये तो अच्छा लगता है हो तेज़ धूप या घनी छाँव डरना कैसा जब घर से निकाल लिए पांव फिर भी कोई साथ ... »

शूरवीर

आज फिर गूँज उठा कश्मीर सुन कर ये खबर दिल सहम गया और घबरा कर हाथ रिमोट पर गया खबर ऐसी थी की दिल गया चीर हैडलाइन थी आज फिर गूँज उठा कश्मीर फ़ोन उठा कर देखा तो उनको भेजा आखिरी मेसेज अब तक unread था न ही पहले के मेसेज पर blue tick था ऑनलाइन status भी घंटों पहले का दिखला रहा था अब मेरा जी और ज़ोरों से घबरा रहा था सोचा रहा था उस खबर में कही एक नाम उनका न हो जिसमे लिखा था आज फिर देश ने खोया अपना शूरवीर आज ... »

तुमको लिखा करूंगी

अब से मैं प्यार लिखूंगी तो तुमको लिखा करूंगी वो शामें मेरी ,जो तुम पर उधार हैं , उन पर ख्वाब लिखूंगी तो तुमको लिखा करूंगी वो गलियाँ जिन पर तेरे वापस आने के निशान नहीं उन पर इंतजार लिखूंगी तो तुमको लिखा करूंगी धड़क जो हुई कुछ तेरे नाम सा सुन कर उन पर एहसास लिखूंगी तो तुमको लिखा करूंगी कभी जो मायूसी मुझसे आ लिपटी उन पर शाद लिखूंगी तो तुमको लिखा करूंगी दर्द और ज़िन्दगी दोनों तुमसे मिले उन पर ख्याल लिखू... »

मलाल

मुझे ताउम्र ये मलाल रहेगा तुम क्यों आये थे मेरी ज़िन्दगी में ये सवाल रहेगा जो सबक सिखा गए तुम वो बहुत गहरा है चलो प्यार गहरा न सही पर उसका हासिल सुनहरा है गैरों की नज़र से नहीं खुद अपनी नज़र से परखा था तुम्हें मुझे लगा तेरे मेरा संग कमाल रहेगा मुझे ताउम्र ये मलाल रहेगा अब क्या ज़िक्र करे तुम्हारी मजबूरियों पर पोर ख़तम हो जाते हैं उँगलियों पर गलती से जो किसी ने भी जाना मेरा दावा है तेरे नाम पर बवाल रहेग... »

मेरे दर्द

मेरे दर्द सिर्फ मेरे हैं इन्हें अपनी आँखों का पता क्यों दूँ तरसे और बरसे इन्हें अपने दर्दों से वो लगाव क्यों दूँ मेरा अंधापन मेरी आँखों को चुभता है पर अपने लिए फैसलों पर इसे रोने क्यों दूँ मेरे दर्द सिर्फ मेरे हैं इन्हें अपनी आँखों का पता क्यों दूँ बहुत कुछ देखा इन आँखों ने अब ये भी थक गई हैं चैन से जीने दूँ अब इनको भी थोड़ा आराम क्यों न दूँ मेरे दर्द सिर्फ मेरे हैं इन्हें अपनी आँखों का पता क्यों द... »

एक ऐसी ईद

एक ऐसी ईद भी आई एक ऐसी नवरात गई जब न मंदिरों में घंटे बजे न मस्जिदों में चहल कदमी हुई बाँध रखा था हमने जिनको अपने सोच की चार दीवारों में अब समझा तो जाना हर तरफ उसके ही नूर से दुनिया सजी एक ऐसी ईद भी आई एक ऐसी नवरात गई मैं जिधर देखूं वो ही वो है हर जीव हर ज़र्रे में वो है कोई जगह नहीं इस दुनिया में जहाँ से उसने अपने बच्चों की न सुनी एक ऐसी ईद भी आई एक ऐसी नवरात गई किसने सोचा था ऐसे भी दिन आयेंगे मंद... »

रुख्सत

ये जो लोग मेरी मौत पर आज चर्चा फरमा रहे हैं ऊपर से अफ़सोस जदा हैं पर अन्दर से सिर्फ एक रस्म निभा रहे हैं मैं क्यों मरा कैसे मरा क्या रहा कारन मरने का पूछ पूछ के बेवजह की फिक्र जता रहे हैं मैं अभी जिंदा हो जाऊँ तो कितने मेरे साथ बैठेंगे वो जो मेरे रुख्सत होने के इन्जार में कब से घडी देखे जा रहे हैं इन सब के लिए मैं बस ताज़ा खबर रहा उम्र भर जिसे ये बंद दरवाज़ों के पीछे चाय पकोड़ों के साथ कब से किये जा र... »

ताज महल

नाकाम मोहब्बत की निशानी ताज महल ज़रूरी है जो लोगो को ये बतलाये के मोहब्बत का कीमती होना नहीं बल्कि दिलों का वाबस्ता होना ज़रूरी है दे कर संगमरमर की कब्रगाह कोई दुनिया को ये जतला गया के मरने के बाद भी मोहब्बत का सांस लेते रहना ज़रूरी है वो लोग और थे शायद, जो तैरना न आता हो तो भी दरिया में डूब जाते थे मौत बेहतर लगी उनको शायद क्योंकि महबूब का दीदार होना ज़रूरी है मरते मर गए पर खुद को किसी और का होने न दि... »

प्रेम

प्रेम, जिसमें मैं ही मैं हो हम न हो डूब गए हो इतने के उबरने का साहस न हो वो प्रेम नहीं एक आदत है उसकी जो एक दिन छूट जाएगी फिर से जीने की कोई वजह तो मिल जाएगी जब तू उस घेरे के बाहर निहारेगा तब ही तेरा आत्म सम्मान तुझे फिर से पुकारेगा तू झलांग लगा पकड़ लेना उसकी कलाई को उसकी आदत के चलते तूने नहीं सोचा खुद की भलाई को तब ही तू पुनः स्वप्रेम कर पायेगा फिर से खुद को “जीता ” हुआ देख पायेगा क्योंकि वो प्रे... »

मेरे शिव

ओ मेरे शिव, मैं सच में तुमसे प्यार कर बैठी सबने कहा , क्या मिलेगा मुझे उस योगी के संग जिसका कोई आवास नहीं वो फिरता रहता है बंजारों सा जिसका कोई एक स्थान नहीं सब अनसुना अनदेखा कर दिया मैंने अपने मन मंदिर में तुमको स्थापित कर बैठी ओ मेरे शिव, मैं सच में तुमसे प्यार कर बैठी सबने समझाया , उसका साथ है भूतो और पिशाचों से वो क्या जुड़ पायेगा जज्बातों से पथरीले रास्तों पे चलना होगा उसके साथ लिपटे होंगे विष... »

आख़िरी इच्छा

कभी कभी सोचती हूँ अगर इस पल मेरी साँसें थम जाये और इश्वर मुझसे ये कहने आये मांगो जो माँगना हो कोई एक अधूरी इच्छा जो अभी इस पल पूरी हो जाये मैं सोच में पड़ जाती हूँ के ऐसा अगर सच हुआ तो तो क्या माँगू जो इसी पल मुझे तृप्त कर जाये बहुत कुछ पीछे छूट गया क्या वहाँ जा के कोई गलती सुधार ली जाये या कोई खुशनुमा लम्हा फिर से जिया जाये फिर सोचा जो बीत गया वो बात गई, तो चलो इस आखिरी पल में अपने जन्म से जुड़े रि... »

बहुत देर

बहुत देर कर दी ज़िन्दगी तूने मेरे दर पे आने में हम तो कब से लगे थे तुझे मनाने में अब तो न वो प्यास है न वो तलाश है ,मानों खुद को पा लिए हमने किसी के रूठ जाने में बहुत देर कर दी ज़िन्दगी तूने मेरे दर पे आने में तेज़ हवा में जलाया चिराग क्यों बार बार बुझ जाता है जब की कोई कसर नहीं छोड़ी हमने उसके आगे घेरा बनाने में बहुत देर कर दी ज़िन्दगी तूने मेरे दर पे आने में मैं मायूस नहीं हूँ बस तुझको समझा गया हूँ ढ... »

हाय रे चीन

हिंदी कविता व्यंग्य शीर्षक-: हाय रे चीन (कोरोना और चाइना ) हाय रे चीन चैन लिया तूने सबका छीन कुछ भी न बचा तुझसे ऐसा जो न खाया तूने बीन बीन हाय तू कैसा शौक़ीन सारी दुनिया को दे के Covid 19 कर दिया तूने शक्तिहीन जब वो रो रही बिलख रही तब तू बन ने चला महा महीम हाय रे चीन तुझ पर Biological Weapon बनाने का आरोप लगा फिर भी तू है लज्जाहीन ये बीमारी देने के बाद तू बढ़ा रहा अपना व्योपार दे कर दुनिया को Mask औ... »

कोरोना वायरस

धर्म-जाति से परे हिंदी कविता एक भयावह महामारी पर  लिखना नहीं चाहती थी  पर लिखना पड़ा  कहना नहीं चाहती थी  पर कहना पढ़ा  आज कल जो माहौल है  उसे देख ये ख़ामोशी तोडना पड़ा  जब हम जैसे पढ़े लिखे ही  चुप हो जायेंगे  तो इस देश को कैसे  बचा  पाएंगे  जो फंसे हुए हैं हिन्दू -मुस्लिम  के आपसी मुद्दों में  उन्हें खींच कर बाहर  कैसे ला पाएंगे  भारत घर है हमारा  जो एक बीमारी से ग्रस्त है  कोरोना तो अभी आया है  पर इ... »

ख्वाहिशें

ख्वाहिशें सुख गई हैं ऐसे मौसम के बदलते मिजाज़ से फसलें जैसे क्या बोया और क्या पाया सपनों और हक़ीकत में कोई वास्ता न हो जैसे ख्वाहिशें सुख गई हैं ऐसे कल तक जो हरी भरी मुस्कुरा रही थी आज खुद अपनी नज़र लग गई हो जैसे ख्वाहिशें सुख गई हैं ऐसे ये मंज़र देख के हाथ खड़े कर लिए थे हमने , पर ये दिल, फिर उन्ही ख्वाहिशों को मुकम्मल करने की तहरीक दे रहा हो जैसे …… तहरीक- प्रेरणा/Motivation अर्चना की रचना “सिर्फ लफ्... »

कोई मिल गया

इस हसीन शाम में , उमर की ढलान में हाथ थामे चलने को कोई मिल गया है हाँ मुझे कोई मिल गया है कल क्या हो नहीं जानती , पर इस मंजिल तक आते आते जो थकान थी उस से थोडा आराम मिल गया है हाँ मुझे कोई मिल गया है दिल खोल के रख दिया उसके सामने मैं बस आज में जीती हूँ , वो छोड़ दे या थाम ले वो समझता है मेरी इस बेफिक्री का सबब, कि आस रखने से कोई गहरा तजुर्बा मुझे मिल गया है हाँ मुझे कोई मिल गया है कुछ और कहूँ तो जल्... »

भरोसा

आज की सच्ची घटना पर आधारित हिंदी कविता शीर्षक :- भरोसा आज मेरी क्यारी में बैठा परिंदा मुझे देख छुप गया मैं रोज़ उसको दाना डालता हूँ फिर भी वो डरा सहमा अपने पंखो के भीतर छुप गया जैसे बचपन में हम आँखों पे हथेली रख छुप जाया करते थे वैसे ही भोलेपन से वो भी मुझसे छुप गया उसने सोचा के मैंने जाना नहीं के वो वहाँ बैठा हुआ है मैं भी चुपके से पानी रख वहाँ से निकल गया उसके भोलेपन पर मुस्कुराया भी और थोडा रोना... »

हाँ

तुम उस दिन जो हाँ कर देते तो किसी को नया जीवन देते पर तुम्हारी ज्यादा सतर्क रहने की आदत ने देखो किसी का मनोबल दबा दिया कोई पढना चाहता था तुम्हारी मदत से आगे बढ़ना चाहता था पर तुमने अपने बटुए झाँक उसे नए जीवन से मरहूम किया फिर वही लौटने को मजबूर किया जहाँ से वो निकलना चाहता था कुछ ख्वाब देखे थे उन्हें पूरा करना चाहता था पर हाय ,तुमने ये क्या किया अपना बटुआ दिखा उसे अपने दर से रुखसत किया … चलो माना उ... »

थोड़ी सी नमी

तूफानों को आने दो मज़बूत दरख्तों की औकात पता चल जाती है पेड़ जितना बड़ा और पुराना हो उसके गिरने की आवाज़ दूर तलक़ आती है सींचा हो जिन्हें प्यार से उन्हें यूं बेजान देख कर एक आह सी निकलती है पर उसे जिंदा रखने की ललक सब में कहा होती है ज़रा कोई पूछे उस माली से जिसकी एक उम्र उसकी देखरेख में निकल जाती है थोड़ी सी नमी हर बात सवाँर देती है रिश्ता हो या पौधा जडें मज़बूत हो तो थोड़ी से परवाह, उन्में नयी जान डाल दे... »

इस बार

सोचती हूँ, क्या इस बार तुम्हारे आने पर पहले सा आलिंगन कर पाऊँगी या तुम्हें इतने दिनों बाद देख ख़ुशी से झूम जाउंगी चेहरे पे मुस्कान तो होगी पर क्या वो सामान्य होगी तुम्हें चाय का प्याला दे क्या एक मेज़बान की तरह मिल पाऊँगी तुम सोफे पर बैठे शायद घर की तारीफ करोगे माहौल को हल्का करने ज़िक्र बाहरी नजारों का करोगे तुम्हारी इधर उधर की बातों से क्या मैं खुद को सहज कर पाऊँगी मेरी ख़ामोशी पढ़ तुम सोचोगे जैसा छो... »

मैं कुछ भूलता नहीं

मैं कुछ भूलता नहीं ,मुझे सब याद रहता है अजी, अपनों से मिला गम, कहाँ भरता है सुना है, वख्त हर ज़ख़्म का इलाज है पर कभी-२ कम्बख्त वख्त भी कहाँ गुज़रता है मैं अब बेख़ौफ़ गैरों पे भरोसा कर लेता हूँ जिसने सहा हो अपनों का वार सीने पे , वो गैरों से कहाँ डरता है बुरी आदत है मुझमें खुद से बदला लेने की जब आती है अपनों की बात,तो खुद का ख्याल कहाँ रहता है मैं कुछ भूलता नहीं ,मुझे सब याद रहता है…. अर्चना की रचना “स... »

क्यों

क्यों एक बेटी की विदाई तक ही एक पिता उसका जवाबदार है ? क्यों किस्मत के सहारे छोड़ कर उसको कोई न ज़िम्मेदार है? क्यों घर बैठे एक निकम्मे लड़के पर वंश का दामोदर है ? क्यों भीड़ चीरती अपना आप खुद लिखती एक बेटी का न कोई मदतगार है? क्यों कपूत हो या सपूत हर हाल में स्वीकार है ? फिर क्यों एक बेटी के घर रहने से कुटुंब की इज्ज़त बेकार है ? क्यों कोई जो नज़र डाले उस पर तो वो ही कसूरवार है ? क्यों कोई पूछता नहीं उ... »

लाज़मी सा सब कुछ

मुझे वो लाज़मी सा सब कुछ दिलवा दो जो यूं ही सबको मिल जाता है न जाने कौन बांटता है सबका हिस्सा जिसे मेरे हिस्सा नज़र नहीं आता है बहुत कुछ गैर लाज़मी तो मिला अच्छे नसीबो से पर लाज़मी सा सब कुछ मेरे दर से लौट जाता है न छु सकूँ जिसे , बस महसूस कर सकूँ क्यों ऐसा अनमोल खज़ाना मेरे हाथ नहीं आता है लाज़मी है प्यार ,अपनापन और रिश्ते ,जिसका बिना गैर लाज़मी सा नाम ,शोहरत और पैसा मेरे काम नहीं आता है मुझे ये सब लाज़म... »

दरख्वास्त

सुनो, मुझे अपना बना लो मन को तो लूभा चुके हो अब मुझे खुद में छुपा लो हूँ बिखरी और बहुत झल्ली सी अपनी नज़रों में पगली सी पर तुम्हारी नज़रों से जब खुद को देखा लगने लगी भली भली सी सुनो, इन नज़रों में ता उम्र मुझको बसा लो सुनो, मुझे अपना बना लो मेरे हालातों से न तुमने मुझे आँका न कोई प्रश्न किया न मुझको डाटा ऊपरी आवरण से न परखा मुझको तुमने भीतर मन में झाँका सुनो, इस एहतराम के नज़राने मुझे अपना हमराज़ बना ल... »

सच

कितना सरल है, सच को स्वीकार कर जीवन में विलय कर लेना संकोच ,कुंठा और अवसाद को खुद से दूर कर लेना जिनके लिए तुम अपने हो वो हर हाल में तुम्हारे ही रहेंगे, कह दोगे जो हर बात दिल की तो उनसे रिश्ते और गहरे ही जुड़ेंगे कितना सरल है , औरों की सोच का प्रभाव खुद पर न पड़ने देना और सच कह कर अपना रिश्ता मज़बूत कर लेना यूं जब तुम खुद से मिलते हो तो ही सच स्वीकार करते हो जब अपनेपन से खुद से बात करते हो हवा में उड़... »

मतलब की धूल

वख्त की तेज़ धूप ने सब ज़ाहिर कर दिया है खरे सोने पर ऐसी बिखरी की उसकी चमक को काफ़ूर कर दिया है जब तक दाना डालते रहे चिड़िया उन्हें चुगती रही हुए जब हाथ खाली तो उसकी चोंच ने ज़ख़्मी कर दिया है जब तक मेज़बान थे घर में रौनक लगी रही शामियानों के बुझते ही, इस मेहमान नवाज़ी ने मेरे घर का क्या हाल कर दिया है ये सुरमई धूप अपने संग बहार ले कर आई है, जिसने दोस्ती पे चढ़ी मतलब की धूल को उजागर कर दिया है वख्त की तेज़ ... »

कहाँ तक साथ चलोगे

सबसे जुदा हो कर पा तो लिया तुमको मैंने पर ये तो बोलो कहाँ तक साथ चलोगे ? न हो अगर कोई बंधन रस्मो और रिवाजों का क्या तब भी मेरा साथ चुनोगे बोलो कहाँ तक साथ चलोगे ? एक धागे में पिरोई माला तक सिमित रहेगा प्यार तुम्हारा या इस गठबंधन के बाहर भी तुम मुझसे ही प्यार करोगे कागज़ पर लिखा तो विवश होकर भी निभाना पड़ता है इस विवशता से परे क्या तुम मेरे अंतर्मन को भांप सकोगे कभी जो आहत हो मन तुम्हारा मेरी किसी ना... »

वख्त की आज़मायिश

ये जो मेरा कल आज धुंधला सा है सिर्फ कुछ देर की बात है अभी ज़रा देर का कोहरा सा है धुंध जब ये झट जाएगी एक उजली सुबह नज़र आएगी बिखरेगी सूरज की किरण फिर से ये ग्रहण सिर्फ कुछ देर का है अभी जो अँधेरा ढीठ बना फैला हुआ है तुम्हें नहीं पता,वो तुम्हें आजमाने पर तुला हुआ है इस अँधेरे को चीर उसे दिखलाओ तुम्हारी काबिलयत पर उसे शक सा है ये माना,मंजिल तक पहुँचने के रास्ते कुछ तंग हो गए हैं हसरत थी जिनके साथ चलने... »

मेरा श्रृंगार तुमसे

दर्पण के सामने खड़ी होकर, जब भी खुद को सँवारती हूँ उस दर्पण में तुमको साथ देख,अचरज में पड़ जाती हूँ शरमाकर कजरारी नज़रें नीचे झुक जाती हैं पर कनखियों से तुमको ही देखा करती हैं यूं आँखों ही आँखों में पूछ लेती है इशारों में बताओ कैसी लग रही हूँ इस बिंदिया के सितारों में मेरी टेढ़ी बिंदी सीधी कर तुम जब अपना प्यार जताते हो उस पल तुम अपने स्पर्श से, मुझसे मुझको चुरा ले जाते हो ये पायल चूड़ी झुमके कंगन सब दे... »

शिवांशी

मैं शिवांशी , जल की धार बन शांत , निश्चल और धवल सी शिव जटाओं से बह चली हूँ अपने मार्ग खुद ढूँढती और बनाती आत्मबल से भरपूर खुद अपना ही साथ लिए बह चली हूँ कभी किसी कमंडल में पूजन को ठहर गई हूँ कभी नदिया बन किसी सागर में विलय हो चली हूँ जिस पात्र में रखा उसके ही रूप में ढल गई हूँ तुम सिर्फ मेरा मान बनाये रखना, बस इतनी सी इच्छा लिए तुम्हारे संग बह चली हूँ मुझे हाथ में लेकर जो वचन लिए तुमने उन वचनों को... »

मेरे जैसी मैं

मैं कहाँ मेरे जैसी रह गयी हूँ वख्त ने बदल दिया बहुत कुछ मैं कोमलांगना से काठ जैसी हो गई हूँ मैं कहाँ मेरे जैसी रह गयी हूँ समय के साथ बदलती विचारधारा ने मेरे कोमल स्वरुप को एक किवाड़ के पीछे बंद तो कर दिया है पर मन से आज भी मैं वही ठहरी हुई हूँ मैं कहाँ मेरे जैसी रह गयी हूँ पहले मैं सिर्फ घर संभाला करती थी वख्त आने पे रानी रानी लक्ष्मी बाई बन दुश्मन को पिछाडा करती थी आज मैं एक वख्त में दो जगह बंट गई... »

करम

मेरे महबूब का करम मुझ पर जिसने मुझे, मुझसे मिलवाया है नहीं तो, भटकता रहता उम्र भर यूं ही मुझे उनके सिवा कुछ भी न नज़र आया है लोग इश्क में डूब कर फ़ना हो जाते हैं पर मैंने डूब करअपनी मंजिलों को रु ब रु पाया है मेरे महबूब का करम मुझ पर जिसने मुझे मुझसे मिलवाया है कब तक हाथ थामे चलते रहने की बुरी आदत बनाये रखते क्योंकि, इस आदत के लग जाने पर कोई फिर,खुद पर यकीन न कर पाया है मेरे महबूब का करम मुझ पर जिसन... »

आँखों का नूर

कल उस बात को एक साल हो गया वख्त नाराज़ था मुझसे न जाने कैसे मेहरबान हो गया मेरी धड़कन में आ बसा तू ये कैसा कमाल हो गया कल उस बात को एक साल हो गया रोज़ दुआ भी पढ़ी और आदतें भी बदली सिर्फ तेरी सलामती की चाहत रखना मेरा एक एकलौता काम हो गया कल उस बात को एक साल हो गया सिर्फ तू ही मेरे साथ रहे तुझे किसी की नज़र न लगे सारे रिश्ते एक तरफ सिर्फ तुझसे मिला रिश्ता मेरी पहचान हो गया कल उस बात को एक साल हो गया जब त... »

दोस्ती

चलो थोडा दिल हल्का करें कुछ गलतियां माफ़ कर आगे बढें बरसों लग गए यहाँ तक आने में इस रिश्ते को यूं ही न ज़ाया करें कुछ तुम भुला दो , कुछ हम भुला दें कड़ी धूप में रखा बर्तन ही मज़बूत बन पाता है उसके बिगड़ जाने का मिटटी को क्यों दोष दें कुछ तुम भुला दो , कुछ हम भुला दें यूं अगर दफ़न होना होता ,तो कब के हो गए होते सिल लिए थे कई ज़ख़्म हम दोनों ने , तब जा के ये रिश्ते आगे बढें कुछ तुम भुला दो , कुछ हम भुला दें... »

छल

छल और प्यार में से क्या चुनूँ जो बीत गया उसे साथ ले कर क्यों चलूँ पतंग जो कट गई डोर से वो खुद ही कब तक उड़ पायेगी हालात के थपेडों से बचाने को उसको फिर नयी डोर का सहारा क्यों न दूं जो शाख कभी फूलों से महकी रहती थी वो पतझड़ में वीरान हो चली है उसे सावन में फिर नयी कोपल आने का इंतजार क्यों न दूं छल चाहे जैसा भी हो , उसे ढोना भारी हो जाता है आधा सफ़र तो कट गया , पर रास्ता अभी लम्बा है उस भार को यहीं उतार... »

वख्त

वख्त जो नहीं दिया किसी ने उसे छीनना कैसा उसे मांगना कैसा छिनोगे तो सिर्फ २ दिन का ही सुख पाओगे और मांगोगे तो लाचार नज़र आओगे छोड़ दो इसे भी वख्त के हाल पर जो जान कर सो गया , उसे जगाना कैसा वख्त जो किसी के साथ गुज़ार आये उसका पछतावा कैसा उसका भुलावा कैसा पछता के भी बीते कल को न बदल पाओगे पर भूल कर उसे ज़रूर एक नया कल लिख पाओगे तोड़ लो बीते कल की जंजीरों को ये सर्पलाता है , इनसे लिपट कर, जीना कैसा वख्त त... »

इश्क का राज़ीनामा

काश इश्क करने से पहले भी एक राज़ीनामा ज़रूरी हो जाये जो कोई तोड़े तो हो ऐसा जुर्माना जो सबकी जेबों पर भारी हो जाये फिर देखो बेवज़ह दिल न फिसला करेंगे इश्क की गलियों से बच- बच निकला करेंगे वो ही पड़ेगा इसके चक्करों में, जो सारी शर्तों को राज़ी हो जाये कोई मनचला किसी कॉलेज के बाहर न दिखेगा कोई दिल बहलाने को कुछ यूं ही न कहेगा जिसे निभाना उसकी हैसियत से बाहर हो जाये भटके है जो बच्चे छोटी सी उम्र में दूध के... »

बारिश

बारिश से कहो यूं न आया करे मुझे तेरा उनके बगैर आना अच्छा नहीं लगता तूने आने से पहले दस्तक तो दी थी सर्द मौसम में भिगोने की जुर्रत तो की थी जितना चाहे रिझा ले मुझको रूमानी हो के मुझे उनके बिना भीगना अच्छा नहीं लगता मुझे तेरा उनके बगैर आना अच्छा नहीं लगता दिल्ली की हवा सिली सी हो गई है जलाई थी जो लकडियाँ वो गीली सी हो गई है शीशों पे पड़ी ओस पर इंतजार लिखना, अच्छा नहीं लगता मुझे तेरा उनके बगैर आना अच्... »

ख़त

मैंने उन्हें एक ख़त भिजवाया है एक लिफाफे में उसे रखवाया है देखने में कोरा न लगे,इसलिए उस लिफाफे को खूब सजाया है जो पहुचेगा वो उनके हाथों में रख देंगें वो उसे किताबें में सोचेंगे की क्या पढूं , जब ख़त के अन्दर का हाल लिफाफे की सजावट में उभर आया है मैंने उन्हें एक ख़त भिजवाया है एक लिफाफे में उसे रखवाया है सोचती हूँ कोरा इसे जो छोड़ देती तो क्या उनके मन को कचोट पाती चमकते लिबास ने ढांक रखा है उदास रूह क... »

“लाडली”

मैं बेटी हूँ नसीबवालो के घर जनम पाती हूँ कहीं “लाडली” तो कहीं उदासी का सबब बन जाती हूँ नाज़ुक से कंधो पे होता है बोझ बचपन से कहीं मर्यादा और समाज के चलते अपनी दहलीज़ में सिमट के रह जाती हूँ और कहीं ऊँची उड़ान को भरने अपने सपने को जीने का हौसला पाती हूँ मैं बेटी हूँ नसीबवालो के घर जनम पाती हूँ पराया धन समझ कर पराया कर देते हैं कुछ मुझको बिना छत के मकानो से बेगाना कर देते हैं कुछ मुझको और ... »

यादों की नयी सुबह

गया वख्त जो अक्सर गुज़रता नहीं तमाम रात थोडा हँसा कर थोडा रूला कर अपनापन जता गया जाते जाते कह गया मैं यही हूँ तेरे साथ फिर कभी तन्हाइयों में दस्तक दे जाऊंगा जब कभी तू अकेला हो तेरे साथ ठहर जाऊंगा तुझे अपने आज में जीने का हुनर सीखा जाऊंगा तू मेरे काँधे पर सर रख कर रो लेने जी भर जब सुबह होगी तुझे नयी उम्मीद दे जाऊंगा यहाँ तमाम ऐसे भी है जिनकी किस्मत तुझ जैसी भी नहीं जो तुझ मिला वो उनकी किस्मत में दू... »

“पिता “

लोग कहते हैं , मैं अपने पापा जैसे दिखती हूँ, एक बेटे सा भरोसा था उनको मुझपर मैं खुद को भाग्यशाली समझती हूँ। मैं रूठ जाती थी उनसे, जब वो मेरे गिरने पर उठाने नहीं आते थे पर आज समझती हूँ , वो ऐसा क्यों करते थे आज मैं अपने पैरों पे हूँ , उसी वजय से दे कर सहारा वो मुझे हमेशा के लिए कमज़ोर कर सकते थे। जीवन की कठनाइयों में गर मुझको सहारों की आदत हो जाती तो मैं गिर कर कभी खुद संभल नहीं पाती मेरे आत्मविश्वा... »

कुछ कही छूट गया मेरा

तुम अपना घर ठीक से ढूंढना ,कुछ वहीं छूट गया मेरा ढूंढ़ना उसे , अपने किचन में जहाँ हमने साथ चाय बनाई थी तुम चीनी कम लेते हो ये बात तुमने उसे पीने के बाद बताई थी उस गरम चाय की चुस्की लेकर जब तुमने रखा था दिल मेरा तुम अपना किचन ठीक से ढूंढना , कुछ वही छूट गया मेरा ढूंढना उसे , उस परदे के पास जो उस बालकनी पे रौशनी का पहरा देता था फिर भी उस से छन के आती रौशनी को खुद पे ले कर जब तुमने ढका था चेहरा मेरा त... »

नव प्रभात

रात कितनी भी घनी हो सुबह हो ही जाती है चाहे कितने भी बादल घिरे हो सूरज की किरणें बिखर ही जाती हैं अंत कैसा भी हो कभी घबराना नहीं क्योंकि सूर्यास्त का मंज़र देख कर भी लोगो के मुँह से वाह निकल ही जाती है रात कितनी भी घनी हो सुबह हो ही जाती है अगर नया अध्याय लिखना हो तो थोड़ा कष्ट उठाना ही पड़ता है पत्थर को तराशने में थोड़ा प्रहार सहना पड़ता है सही आकर ले कर ही वो बेशकीमती बन पाती है रात कितनी भी घनी हो स... »

तेरी याद

मैंने घर बदला और वो गलियाँ भी फिर भी तेरी याद अपने संग इस नए घर में ले आया एक मौसम पार कर मैं फिर खड़ी हूँ, उसी मौसम की दस्तक पर, वही गुनगुनाती ठंड और हलकी धुंध, जिसमे कभी तू मुझे आधी रात मिलने आया वो एक पल में मेरा बेख़ौफ़ हो कुछ भी कह जाना , और फिर तुझे अजनबी जान कसमसा जाना , कितनी दफा मैंने खुद को इसी कश्मकश में उलझा पाया फिर यूं लगने लगा जैसे तू मेरा ही तो था , कब से, बस रूबरू आज हुआ , शायद कुछ अ... »

नियति का खेल

जब हम बुरे समय से गुजरते हैं अपने ईश्वर को याद करते हैं सब जल्दी ठीक हो जाये यही फरियाद करते हैं भूल कर उस ईश्वर का जीवन संघर्ष हम सिर्फ अपनी बात करते हैं चलो आओ याद दिलाती हूँ एक रोचक बात जो तुम सब को भी है याद जब उस ईश्वर ने अवतार लिया धरती पे तो वो भी दर्द से अछूता न था कहने को तो राज कुंवर थे पर जीवन बहुत कष्ट पूर्ण था रघुकुल में जन्मे कोई और नहीं वो सबके राम दुलारे थे जो सबकी आँख के तारे थे उ... »

पुनर्विचार

क्या कोई अपने जीवन से किसी और के कारण रूठ जाता है ? के उसका नियंत्रण खुद अपने जीवन से झूट जाता है? हां जब रखते हो, तुम उम्मीद किसी और से, अपने सपने को साकार करने की तो वो अक्सर टूट जाता है जब भरोसा करते हो किसी पे उसे अपना जान कर, खसक जाती है पैरों तले ज़मीन भी जब वो “अपना” अपनी मतलबपरस्ती में तुम्हे भूल जाता है तुम आज मायूस हो, उसकी वजह कोई और नहीं तुम हो, सौंपी थी डोर खुद अपने जीवन की... »

मैं समंदर हूँ

मैं समंदर हूँ ऊपर से हाहाकार पर भीतर अपनी मौज़ों में मस्त हूँ मैं समंदर हूँ दूर से देखोगे तो मुझमें उतर चढ़ाव पाओगे पर अंदर से मुझे शांत पाओगे मैं निरंतर बहते रहने में व्यस्त हूँ मैं समंदर हूँ ऐसा कुछ नहीं जो मैंने भीतर छुपा रखा हो जो मुझमे समाया उसे डूबा रखा हो हर बुराई बाहर निकाल देने में अभ्यस्त हूँ मैं समंदर हूँ हूँ विशाल इतना के एक दुनिया है मेरे अंदर जो आया इसमें , उसका स्वागत है बाहें खोल कर ... »

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