जब हम बुरे समय से गुजरते हैं अपने ईश्वर को याद करते हैं सब जल्दी ठीक हो जाये यही फरियाद करते हैं भूल कर उस ईश्वर का जीवन संघर्ष हम सिर्फ अपनी बात करते हैं […]

क्या कोई अपने जीवन से किसी और के कारण रूठ जाता है ? के उसका नियंत्रण खुद अपने जीवन से झूट जाता है? हां जब रखते हो, तुम उम्मीद किसी और से, अपने सपने को […]

मैं समंदर हूँ ऊपर से हाहाकार पर भीतर अपनी मौज़ों में मस्त हूँ मैं समंदर हूँ दूर से देखोगे तो मुझमें उतर चढ़ाव पाओगे पर अंदर से मुझे शांत पाओगे मैं निरंतर बहते रहने में […]

चलो रस्मों रिवाज़ों को लांघ कर कुछ दिल की सुनी जाये कुछ मन की करी जाये एक लिस्ट बनाते हैं अधूरी कुछ आशाओं की उस लिस्ट की हर ख्वाहिश एक एक कर पूरी की जाये […]

चलो थोड़ी मनमर्ज़ियाँ करते हैं पंख लगा कही उड़ आते हैं यूँ तो ज़रूरतें रास्ता रोके रखेंगी हमेशा पर उन ज़रूरतों को पीछे छोड़ थोड़ा चादर के बाहर पैर फैलाते हैं पंख लगा कही उड़ […]

मैं स्त्री हूँ , और सबका सम्मान रखना जानती हूँ कहना तो नहीं चाहती पर फिर भी कहना चाहती हूँ किसी को ठेस लगे इस कविता से तो पहले ही माफ़ी चाहती हूँ सवाल पूछा […]

बात उन दिनों की है जब बचपन में घरोंदा बनाते थे उसे खूब प्यार से सजाते थे कही ढेर न हो जाये आंधी और तूफानों में उसके आगे पक्की दीवार बनाते थे वख्त गुज़रा पर […]

श्याम तेरी बन के मैं बड़ा पछताई न मीरा ही कहलाई न राधा सी तुझको भायी श्याम तेरी बन के मैं बड़ा पछताई न रहती कोई कसक मन में जो मैं सोचती सिर्फ अपनी भलाई […]

देखो फिर आई दीपावली, देखो फिर आई दीपावली अन्धकार पर प्रकाश पर्व की दीपावली नयी उमीदों नयी खुशियों की दीपावली हमारी संस्कृति और धरोहर की पहचान दीपावली जिसे बना दिया हमने “दिवाली” जो कभी थी […]

जब तुम आँखों से आस बन के बहते हो उस वख्त तम्हारी और हो जाती हूँ मैं लड़खड़ाती गिरती और संभलती हुई सिर्फ तुम्हारी धुन में नज़र आती हूँ मैं लोगो की नज़रो में अपनी […]

तुम न आ सको तो मुझे अपने साथ ले चलो इत्र बन कर मेहकती रहूंगी तुम्हारे बदन की खुशबू के साथ तुम न आ सको तो मुझे अपने साथ ले चलो रुमाल बन कर, तुम्हारे […]

ज़िन्दगी मुझ से बस अपनी ही मनवाती है कभी मेरी सुनती नहीं बस अपनी ही सुनाती है… कभी जो पूछू सवाल उस से,माँगा करू जवाब उस से बस वो धीरे से मुस्कुराती है ज़िन्दगी मुझ […]

मैनें पूछा के फिर कब आओगे, उसने कहा मालूम नहीं एक डर हमेशा रहता है , जब वो कहता है मालूम नहीं चंद घडियॉ ही साथ जिए हम , उसके आगे मालूम नहीं वो इस […]

हर तरफ उजाला हो ये जरुरी तो नहीं मुझे धीमी रोशनी भी अच्छी लगती है यहाँ हर कोई एक आरज़ू ओढ़े बैठा है पर सबकी जरुरी हो ये जरुरी तो नहीं मुझे कमियां भी अच्छी […]

मेरी कलम , जिससे कुछ ऐसा लिखूँ के शब्दों में छुपे एहसास को कागज़ पे उतार पाऊँ और मरने के बाद भी अपनी कविता से पहचाना जाऊँ मुझे शौक नहीं मशहूर होने का बस इतनी […]

कोई शाम ऐसी भी तो हो जब तुम लौट आओ घर को और कोई बहाना बाकी न हो मुदत्तों भागते रहे खुद से जो चाहा तुमने न कहा खुद से तुम्हारी हर फर्माइश पूरी कर […]

मेरी छाँव मे जो भी पथिक आया थोडी देर ठहरा और सुस्ताया मेरा मन पुलकित हुआ हर्षाया मैं उसकी आवभगत में झूम झूम लहराया मिला जो चैन उसको दो पल मेरी पनाहो में उसे देख […]

जब से इश्क़ का विषपान किया मैं पूर्ण खुद को पाती हूँ कितना भी कड़वा हो ये विष इसे पी कर मैं श्री शंकर सी मलंग रहना चाहती हूँ मैं बस तेरा ध्यान लगाए हुए […]

मैं हूँ नीर, आज की समस्या गंभीर मैं सुनाने को अपनी मनोवेदना हूँ बहुत अधीर , मैं हूँ नीर जब मैं निकली श्री शिव की जटाओं से , मैं थी धवल, मैं थी निश्चल मुझे […]

इस बार घट स्थापना वो ही करे जिसने कोई बेटी रुलायी न हो वरना बंद करो ये ढोंग नव दिन देवी पूजने का जब तुमको किसी बेटी की चिंता सतायी न हो सम्मान,प्रतिष्ठा और वंश […]

जब भी तुम्हें लगे की तुम्हारी परेशानियों का कोई अंत नहीं मेरा जीवन भी क्या जीना है जिसमे किसी का संग नहीं तो आओ सुनाऊँ तुमको एक छोटी सी घटना जो नहीं है मेरी कल्पना […]

थक चूका हूँ , पर हारा नहीं हूँ मैं निरंतर चलता रहूँगा आगे बढ़ता रहूँगा उदास हूँ ,मायूस हूँ पर मुझे जितना भी आज़मा लो , मैं टूटूँगा नहीं , मैं निरंतर कोशिश करता रहूंगा, […]

एक खुशबु सी बिखर जाती है मेरे इर्द गिर्द जब याद आते हैं मुझे मेरे मित्र जब भी मन विचलित होता है किसी अप्रिय घटना से घंटो सुनते रहते हैं वो मेरी बकबक चाहे रात […]

जाओ तुम्हें माफ़ किया मैंने बस इतना सुकून है जैसा तुमने किया वैसा नहीं किया मैंने जाओ तुम्हें माफ़ किया मैंने हाँ खुद से प्यार करती थी मैं ज़रूर पर जितना तुमसे किया उस से […]

आज कल ओझल हो गयी है हिंदी एसे महिलाओं के माथे से बिंदी जैसे कभी जो थोड़ा बहुत कह सुन लेते थे लोग अब उनकी शान में दाग हो हिंदी जैसे लगा है चसका जब […]

हाँ ये सच है, कई बार हुआ है प्यार मुझे हर बार उसी शिद्दत से हर बार टूटा और सम्भ्ला उतनी ही दिक्कत से हर बार नया पन लिये आया सावन हर बार उमंगें नयी, […]

मेरी छाँव मे जो भी पथिक आया थोडी देर ठहरा और सुस्ताया मेरा मन पुलकित हुआ हर्षाया मैं उसकी आवभगत में झूम झूम लहराया मिला जो चैन उसको दो पल मेरी पनाहो में उसे देख […]

नारी होना अच्छा है पर उतना आसान नहीं मेरी ना मानो तो इतिहास गवाह है किस किस ने दिया यहाँ बलिदान नहीं जब लाज बचाने को द्रौपदी की खुद मुरलीधर को आना पड़ा सभा में […]