ज्योति

हजारो लोग तम लेकर, निगलने दौड़ पड़ते हैं !

अगर एक ज्योति हल्की सी, कहीं दिखलाई पड़ती है

Comments

2 responses to “ज्योति”

  1. राम नरेशपुरवाला

    Good

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