देवेश साखरे ‘देव’'s Posts

ममता की छांव

तेरे कांधे पे सर रख, रोना चाहता हूं मां। तेरी गोद में सर रख, सोना चाहता हूं मां। तू लोरी गाकर, थपकी देकर सुला दे मुझे, मैं सुखद सपनों में, खोना चाहता हूं मां। तेरी गोद में सर रख, सोना चाहता हूं मां।। इतना बड़ा, इतनी दूर न जाने कब हो गया, तेरा आंचल पकड़कर, चलना चाहता हूं मां। तेरी गोद में सर रख, सोना चाहता हूं मां।। जीने के लिए, खाना तो पड़ता ही है, तेरे हाथों से भरपेट, खाना चाहता हूं मां। तेरी गोद... »

कतरा बन गिरो

कतरा बन गिरो, पत्ते पर ओंस की भांति। कतरा बन गिरो, शीतल बारिश की भांति। कतरा बन गिरो, सीप में मोती की भांति। कतरा बन गिरो, पिघलते मोम सी ज्योति की भांति। कतरा बन गिरो, मातृभूमि पर लहू की भांति। कतरा बन ऐसे न गिरो, किसी आंखों से आंसू की भांति। देवेश साखरे ‘देव’ »

मैं शायर हूं

शब्दों से खेलना हुनर है मेरा, जज़्बातों से खेलना, हमें आता नहीं। कलम हथियार है मेरा, बाज़ुओं की ताक़त, मैं दिखाता नहीं। नर्म दिल हूं, हां मैं शायर हूं, मोहब्बत के सिवा, कुछ भाता नहीं। दिलों में रहने की आदत है, दिल की लगी को, दिल्लगी बनाता नहीं। देवेश साखरे ‘देव’ »

दुनिया के रंग

देखा है दुनिया को रंग बदलते। मुंह में राम बगल में छुरा लिए चलते। गैरों को मतलब कहां हैं हमसे ‘देव’, यहां अपने ही अपनों को हैं छलते। देवेश साखरे ‘देव’ »

मकर संक्रांति

यूं तो भारतवर्ष, कई पर्वों त्योहारों का देश है। भिन्न बोली-भाषाएं, खान-पान, भिन्न परिवेश है। आओ मैं भारत दर्शन कराता हूं। महत्त्व मकर संक्रांति की बताता हूं। सूर्य का मकर राशि में गमन, कहलाता है उत्तरायण। मनाते हम सभी इस दिन, मकर संक्रांति का पर्व पावन। दक्षिणायन से उत्तरायण में सूर्य का प्रवेश है। यूं तो भारतवर्ष, कई पर्वों त्योहारों का देश है।। गुजरात, उत्तराखंड में उत्तरायण कहते। इस दिन पतंग प्... »

जीवन सारथी

जीवन न्यौछावर कर दो हेतु परमार्थ। प्रतिफल की अभिलाषा बिना निःस्वार्थ। ईश्वर स्वयं बन जाएंगे जीवन सारथी, और बना लेंगे अपना सखा पार्थ। देवेश साखरे ‘देव’ »

हार

तेरे बाहों के हार में, सब कुछ हार जाऊं। तुझ पर अपना दिलो – जां मैं वार जाऊं। तुझ से हार कर भी जीत है मेरी ‘देव’, तेरे आगोश में, जन्नत का मैं करार पाऊं। »

आकांक्षाएं

अपनी आकांक्षाओं को, मैं पर देना चाहता हूं। खुले आसमान को, मुट्ठी में कर लेना चाहता हूं। कल्पनाओं को आकार देना इतना भी मुश्किल नहीं, बस अपनी सोच को, नई नजर देना चाहता हूं। देवेश साखरे ‘देव’ »

कोशिश

हुनर किसी ज़रिए का मोहताज नहीं होता । कल उन्हीं का है, जो कुछ आज नहीं होता । गिरने से डरता क्यों है, पहले उड़ान तो भर, वो भी सीख जाता, जिनका परवाज़ नहीं होता । मंजिल मिलेगी ज़रूर, पहले शुरुआत तो कर, अंजाम नहीं होता, जब तक आगाज़ नहीं होता । खुद पे यकीं रख, शिद्दत से अपना काम तो कर, कामयाबी शोर करेगी, उसमें आवाज़ नहीं होता। यूं हिम्मत ना हार ‘देव’, पहले कोशिश तो कर, कोशिश करने वालों से, ... »

असमंजस में पड़ा इंसान

किस असमंजस में पड़ा इंसान। किस दोराहे पे खड़ा इंसान ।। दौलत के रिश्ते हैं, रिश्तों की यही अहमियत है । वक्त के साथ अपने, जज़्बात बदलने की सहुलियत है । जरूरत खत्म, रिश्ते खत्म, कड़वी, पर यही असलियत है । दौलत बड़ी या रिश्ते, किस बंधन में जकड़ा इंसान। किस असमंजस में पड़ा इंसान। किस दोराहे पे खड़ा इंसान ।। डूबते को बचाना छोड़ कर, ‘वीडियो’ बनाने में हम मशगूल। तड़पते का ‘फोटो’ खीं... »

नया साल

दिल की कलम से ये पैगाम लिखता हूं। तुम्हारे हिस्से खुशियां तमाम लिखता हूं। खुशियों से रोशन हो हर राह तुम्हारा, नये साल का नया कलाम लिखता हूं।। »

उम्मीदों का नववर्ष

उम्मीदों की नई सुबह नववर्ष की। सुख – समृद्धि और उत्कर्ष की ।। आगे बढ़ते हैं, कड़वे पल भुला कर। छोड़ वो यादें, जो चली गई रुला कर। मधुर यादों के साथ, आओ नववर्ष का, स्वागत करें, उम्मीद का दीप जलाकर। बात करें मात्र खुशियां और हर्ष की। उम्मीदों की नई सुबह नववर्ष की । सुख – समृद्धि और उत्कर्ष की ।। आओ नववर्ष में होते हैं संकल्पित। जल की हर बूंद करते हैं संरक्षित। स्वच्छ वातावरण बनाने का प्रय... »

चिड़ियाघर

एक दिन गया मैं चिड़ियाघर, एक भी जानवर न था वहां पर । यह देख मैं रह गया हैरान, हर पिंजरे में था एक इंसान ।। एक पिंजरे में लिखा था ‘ भेड़िया दुराचारी ‘ उसमें बंद था एक क्रूर बलात्कारी । अगले पिंजरे में लिखा था ‘ शेर खूंखार ‘ उसमें बंद था मासूमों का कातिल गुनहगार । अगले पिंजरे में लिखा था ‘ बंदर नकलची ‘ उसमें बंद था झूठा- मक्कार नेता लालची । अगले पिंजरे में लीखा था... »

तारीफ तेरी

तारीफ तेरी, नहीं मेरी जुबां करती है । नजरें पढ़ ले, हाले-दिल बयां करती है ।। इश्क में हूँ तेरे आज भी, जहां जानता है, तेरा हुश्ने-मुकाबला, कोई कहाँ करती है ।। माना बरसों पुराना, इश्के-फसाना हमारा, पर आज भी, इश्के-मिसाल जहां करती है ।। एक तेरे सिवाय, नहीं कोई और जिंदगी में, शक मुझ पर, बेवजह, ख़ामख़ाह करती है ।। कल के लिए, हम अपना आज ना खो दें ‘देव’, कल का फैसला, जिंदगी की इम्तहां करती है... »

किसान की व्यथा

किसान की व्यथा

पसीना सूखता नहीं धूप में। किसान होता नहीं सुख में।। अतिवृष्टि हो या फिर अनावृष्टि। प्रकृति की हो कैसी भी दृष्टि। किसानों के परिश्रम के बिना, कैसे पोषित हो पाएगी सृष्टि। संसार का पोषण करने वाला, क्यों रह जाता है भूख में। पसीना सूखता नहीं धूप में। किसान होता नहीं सुख में।। इनके परिश्रम का मूल्यांकन, हमारी औकात नहीं। ना मिल पाए उचित मूल्य, ऐसी भी कोई बात नहीं। मौसम की मार और सर पर कर्ज का भार, क्यों ... »

आजादी

आजादी के इतने वर्षों बाद भी, आजादी को हम जूझ रहे आज भी ।। कभी नक्सलियों, आतंकियों से आजादी, कभी रिश्वतखोरों, भ्रष्टाचारियों से आजादी । कब ली राहत की साँस हमने, भूली बिसरी बातें हैं, नहीं अब याद भी । आजादी के इतने वर्षों बाद भी, आजादी को हम जूझ रहे आज भी ।। चल रही कहीं जिस्म की निलामी, बरकरार है दहशत की गुलामी । बारूद के ढेर पे बैठे हम सारे, कब निगल जाए हमें और हमारे औलाद भी। आजादी के इतने वर्षों ब... »

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