Mayank Vyas's Posts

तिनके का महत्व

तिनके से सिया ने रावण को डराया, तिनके में राम का स्वरूप दिखाया। श्रद्धा हो तो तिनके में भगवान बसते , नहीं तो मूर्तियों में ही पाषाण दिखते। तिनको से पक्षियों का घर बन जाता, तिनका गजानन के मस्तक पर चढ जाता। तिनका डूबते को सहारा दे देता है, तिनका ब्रह्मशीर्षास्त्र का संधान कर देता है। तिनका पतित को पावन बना देता, तिनका सूतक के सारे दोष मिटा देता। तिनके से पितरों का तर्पण होता, तिनका बड़ा ही अनमोल होत... »

मनोभाव

आरोपों के कठघरे में खड़े हो चाहे, या प्रशस्ति पाने उठे हो पैर हमारे। प्रशंसाओं में कभी हम फूले नहीं, इल्जामों से चिंताओं में डूबे नहीं। कभी कभी पीठ पर खंजर भी खाए, पर कभी स्वार्थ के लिए रिश्ते ना बनाए। चाहे कभी किसी के खातिर कुछ नहीं किया, पर कभी किसी को भूलकर दुख नहीं दिया। अपने अधिकारों को कभी मरने नही दिया , उम्मीदो का दीपक कभी बुझने नहीं दिया । कभी किसी गलत का साथ नही दिया, मैने तो सदा अपने मन... »

बरसात के आंनद और परेशानियां

सावन की कमी पूरी हो गई, भादों में वर्षा की झड़ी हो गई। बदरा गरज गरज कर बरस रहे , निर्मल झरने कल कल कर बह रहे। बिजली चम चम कर चमक रही, मयूरी छम छम कर नाच रही। ठंडी ठंडी हवा सन सना रही, प्रकृति में चारो और हरियाली छा रही। एक तरफ मन में खुशियां आ रही, दूसरी ओर नदियां तांडव दिखा रही। मंदिर मकान सबकुछ डूब गए, अपनों तक जाने वाले रास्ते टूट गए। भ्रष्टाचारी पुल पहली बारिश सह ना सके, नदियों की धारा संग मिल... »

भक्त प्रहलाद

एक असुर के घर पर जनमा हरि का भक्त महान, उसने मां के गर्भ में ही ले लिया भक्ति का ज्ञान। आयु में छोटा था,नाम प्रहलाद था, किन्तु हरि पर उसको अटूट विश्वास था। कोई ग़लत कर्म वे कभी ना करता था, बस हर समय हरि का ही नाम जपता था। उसका पिता उसे भी कपटी असुर बनाने पर तुला था, मगर उसका मन तो केवल प्रभु की भक्ति में लगा था। प्रहलाद, नारद के सानिध्य में नारायण नारायण सीखता था, हर समय नारायण नारायण का भजन ही बस... »

हम हार नहीं मानेंगे।

दुनिया पर आ पड़ी है विपदा भारी, चारो ओर से घेरे हुए है भीषण महामारी। चारो और संकटकाल का दौर है, सुपरपावर भी बिल्कुल मजबूर है। अर्थव्यवस्था का हाल बिल्कुल नीचे है, जैसे कछुआ गाड़ी को खींचे है। मजदूर मजबूर हो गया है, मानो भाग्य ही रुष्ठ हो गया है। प्रवासी पैदल ही अपनों के पास निकल गए, भूखे प्यासे इस सफर में पैरो में छाले पड़ गए। गाड़ी घोड़े, काम धंधे सब बंद से हो गए, गद्दी पर बैठने वाले ठैला चलाने क... »

मायापति की माया

अभिमन्यु वध से व्याकुल अर्जुन जयद्रथ की कायरता  सुनकर के क्रोध से जल उठा। जल रही प्रतिशोध की आग को शांत करने चीखकर प्रतिज्ञा कर उठा । या तो सायंकाल तक जयद्रथ का मस्तक – धड़       से अलग कर दूंगा,नहीं तो जलती चिता पर अपने प्राण त्याग दूंगा।। सुनकर अर्जुन की प्रतिज्ञा कौरव खेमे में बेचैनी सी छा गई, जयद्रथ को लगने लग गया अब तो मृत्यु आ गई। चारों ओर विचारो का दौर सा शुरू हो गया , जयद्रथ सिंध भाग... »

सैनिक की अंतिम चाहत

मैं सैनिक हूं, मैं देश को संभालता हूं, हर रोज मृत्यु को मारता हूं, मैं मौत से नहीं डरता हूं, मौत को तो मुठ्ठी में लेकर चलता हूं, परिवार की चिंता नहीं करता हूं, परिवार देश के हवाले करता हूं, अंतिम समय में भी स्वार्थ नहीं चाहता हूं, बस एक ही ख्वाहिश ही ईश्वर से फरमाता हूं, है ईश्वर कुछ ऐसा चमत्कार कर दो , मुझमें फिर से प्राणों को भर दो, बस भारती के शत्रुओं को मस्तक विहीन कर दूं, हिन्दुस्तान को शत्रु... »

देश दर्शन

शब्दों की सीमा लांघते शिशुपालो को, कृष्ण का सुदर्शन दिखलाने आया हूं,                                  मैं देश दिखाने आया हूं।। नारी को अबला समझने वालों को, मां काली का रणचंडी अवतार याद दिलाने आया हूं,                          मैं देश दिखाने आया हूं।। वचन मर्यादा को शून्य कहने वालो को, राम का वनवास याद दिलाने आया हूं,                                  मैं देश दिखाने आया हूं।। प्रेम विरह में मरने वाल... »

श्री गणेश वंदना

है बुद्धिदाता,बुद्धि का सबको दान करो। है चिंताहरण,संसार की सब चिंता हरो। है विघ्नहर्ता ,सृष्टि के सब विघ्न हरो। है पापहर्ता ,नर नारी के सब पाप हरो। है वक्रतुंड,निर्विघ्न सब मेरे काज करो। है सूर्यकोटि,दूर जगत का अंधकार करो। है रिद्धि सिद्धि के स्वामी,हर घर में तुम वास करो। है मुषकधारी,इस सेवक को सेवा में स्वीकार करो। है कृपासागर,इस सेवक पर बस एक कृपा करो। मन ना मेरा भटके कभी, हर पल बस तेरा ध्यान धर... »

“मैं स्त्री हूं”

सृष्टि कल्याण को कालकूट पिया था शिव ने, मैं भी जन्म से मृत्यु तक कालकूट ही पीती हूं।                                                    मैं स्त्री हूं।                                              (कालकूट – विष) मचा था चारों ओर घोर त्राहिमाम जब,कोई ना था बचाने को, तब तुम्हें बचाने वाली दुर्गा – महाकाली हूं।                                                     मैं स्त्री हूं। मैं जटाधीश ... »

बचपन

वो मां का हाथ पकड़कर चलना, वो दौड़कर भाई का पकड़ना। वो दादी के किस्से कहानी सुनना, वो धागे में हाथ पिरोना। वो गर्मी में नानी के घर जाना, वो मामा का गोद में उठाना । वो दोस्तो के साथ दिनभर खेलना, वो चिंतामुक्त शरारती जीवन जीना। वो सुबह उठकर स्कूल जाना, वो बहाना बनाकर वापस आना। वो स्कूल में तिरछी आंखों से उसे निहारते रहना, वो शक्तिमान का नाटक देखते रहना। वो रूठकर कोने में बैठ जाना, वो मां का दुलार पा... »

सच्ची आजादी दिला दो तुम

हे दीनबंधु,परमपिता परमात्मा, करते हम तुमसे बस यही प्रार्थना, सच्ची आजादी दिला दो तुम , एक ऐसा देश बन दो तुम। बेटियां जहां कोख में ही ना मारी जाती हो, हर घर में हर नारी सुख सम्मान पाती हो। माता पिता को जहां पुत्र से सम्मान मिले, भाई भाई में राम लखन सा प्यार मिले। देश का हर नेता जहां भ्रष्टाचार मुक्त हो , देश का हर घर निर्धनता विमुक्त हो। शिक्षा जहां समान अधिकार से मिलती हो, हर कृष्ण को अपनी राधा मि... »

तू मेरी है जिंदगी

एक प्यारा सा सपना! है जिंदगी, तेरी जुल्फों का लटकना !है जिंदगी, तेरी आंखो का काजल! है जिंदगी, मैने कहा तू मेरी! है जिंदगी। तेरे पैरो कि पायल, हैं जिंदगी! तेरे हांथो का कंगन, है जिंदगी! तेरा मेरा बंधन ,है जिंदगी! मैने कहा तू मेरी, है जिंदगी। तेरा खिलखिलाना, है जिंदगी! तेरा रूठकर बैंठ जाना,है जिंदगी! मेरा तुझको मनाना,है जिंदगी! मैने कहा तू मेरी ,है जिंदगी। मेरा तुझको पुकारना, है जिंदगी! तेरा इंतजार ... »

सत्ता के निराले खेल

मध्य प्रदेश की राजनीति का खेल बड़ा निराला था, पांच साल की सत्ता को दो वर्षो में ही मारा था। महाराज के सारे सपने एक वर्ष में टूट गए, महाराज कांग्रेस से बिल्कुल देखो रूठ गए। रूठकर महाराज ने सालो पुराना रिश्ता तोड़ दिया, महाराज ने कॉग्रेस से सारा नाता तोड़ दिया। चलती सत्ता की गाड़ी को पटरी से उतार दिया, मामा के संग मिलकर फिर से कमल खिला दिया। देखने वाले देखते ही रह गए, महाराज राज्यसभा का टिकट ले गए। ... »