7 Comments

  1. मयंक जी आपकी कविता की जितनी तारीफ की जाए उतनी कम है ,बहुत ही सुंदर तरीके से अपने प्राचीन ग्रंथों व कथाओं के माध्यम से स्त्री को श्रेष्ठ सिद्ध किया है, सच में नारी महान होती है

  2. बहुत ख़ूब मयंक भाई, स्त्री के मन – मस्तिष्क के बारे में बहुत सुंदर प्रस्तुतीकरण।very nice.

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