बेकद्रों की महफ़िल मे कद्रदान ढूंढ रहा हूँ
अनजान लोगो मे अपनी पहचान ढूंढ रहा हूँ
अंधेरा करने वालों से रौशनी की मांग कर रहा हूँ
काली हुई रात मे रोशन जहान ढूढ रहा हूँ
मशगूल है सब अपने मे किसको किसकी फ़िक्र है
बेफिक्र ज़माने मे अपना फ़िक़्रदान ढूंढ रहा हूँ
करूँ किस पर कितना एतबार अब इस जहाँ मे
एतबार करने वाले ऐसे इंसान ढूंढ रहा हूँ
कदम कदम मिला कर चलने वाले कहाँ गये
बारिश मे उनके क़दमों के निशान ढूंढ रहा हूँ
ख़्वाहिशें जो दबी रहे गई दिल की तन्हाइयों मे
डूब कर दिल की गहराइयों मे अरमान ढूंढ रहा हूँ
पंकज प्रिंस
Author: PANKAJ PRINCE
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पहचान
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सम्बन्ध
रिश्तों की डोर मे मजबूरियों का यह क्या सिला है,
अपनों के बीच यह कैसा नफ़रत का फूल खिला हैगुलिस्तां महकता था कभी जिनकी किलकारियों से,
खुश्बू बिखरती थी कभी बागीचे की फुलवारियों से
सींचता था जो प्यार से उसे बिखरा चमन मिला है,
रिश्तों की डोर मे मजबूरियों का यह क्या सिला हैसच्ची चाहतों के भंवर मे फंसी यह कैसी जिंदगी है,
इन पत्थर दिलो के लिए यह कैसी बंदिगी है
मुझको भी क्यों ना बनाया उनसे यह गिला है,
रिश्तों की डोर मे मजबूरियों का यह क्या सिला हैबढ़ते फासले दरमियान के कहाँ तक जायेंगे
दूर होकर भी एक दूजे को बहुत याद आयेंगे
देख कर दुनिया के दावों को ऊपर वाला भी हिला है,
रिश्तों की डोर मे मजबूरियों का यह क्या सिला हैअनसुलझे सवालों के साथ पहेली यह जीवन रेखा,
जवाबो को ढूंढ़ती मैंने अपनी ज़िन्दगी को देखा
दांव पर लगी ज़िंदगियों का यह क्या सिलसिला है,
रिश्तों की डोर मे मजबूरियों का यह क्या सिला है
अपनों के बीच यह कैसा नफ़रत का फूल खिला हैपंकज प्रिंस
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कल किसने देखा कल आये या ना आये
जीवन संदेश
कल किसने देखा कल आये या ना आये
आज की तू परवाह कर ले कही यह भी चला न जायेदेख दुनिया की हालत अब तो तू संभल जा
कहे रही तुझसे जो सरकार वह तू मान जा
कल के लिए तू आज घर पर ही रहे जाये
कल किसने देखा कल आये या ना आयेसाफ सफाई हाथ की धुलाई है जीवन आधार
कर लो यह सब जो खुद के जीवन से है प्यार
निकल कर बाहर तू कोरोना क्यों फैलाये
कल किसने देखा कल आये या ना आयेवक़्त है देश के लिए कुछ कर गुजरने को
बना के रखो दूरी अपनों से आगे जीने को
ऐसा न हो कोरोना तुझे या अपनों को खा जाये
कल किसने देखा कल आये या ना आयेआओ करें यह वायदा खुद से आगे बढ़ कर
हराएंगे हम सब कोरोना को इस पर चढ़ कर
दुआ है ईश्वर से अब किसी की जान न जाये
कल किसने देखा कल आये या ना आये
पंकज प्रिंस -
मेरे वीराने जहाँ को भी कोई बसाएगा
मेरे वीराने जहाँ को भी कोई बसाएगा
क्या यह ऐसे ही उजड़ा रहे जाएगा
दो चार दिन को तो आते है सब
पर जिसका इंतजार वह कब आयेगाइंतजार करते हुए थक सी गई है आंखियां
उनके इंतजार मे सूनी पड़ी है गलियां
बरसो हो गए पथ निहारते हुए
क्या इस पथ अब कोई नहीं आयेगा
मेरे वीराने जहाँ को भी कोई बसाएगाथक सी गई आँखे आसमान की तपिश से
ठहर गई ज़िन्दगी उनके प्यार की बंदिश से
अब तो प्यास बुझा दे ऐ मेरी ज़िन्दगी
ना जाने वह कब प्यार बरसाएगा
मेरे वीराने जहाँ को भी कोई बसाएगामेरे वीराने जहाँ को भी कोई बसाएगा
क्या यह ऐसे ही उजड़ा रहे जाएगा
दो चार दिन को तो आते है सब
पर जिसका इंतजार वह कब आयेगा
पंकज प्रिंस -
अपमान
अपमान करें कोई तेरा सम्मान उसे ही तुम देना
जो कोई बुराई तेरी करें बदला ना बुराई से लेनागीता मैं यही और रामायण मैं और धर्म सभी यह कहते है
जो त्यागी है वह त्याग करें हंस हंस कर सौ दुख सहते है
त्याग का दीप जले मन मैं पल एक नहीं बुझने देना
जो कोई बुराई तेरी करें बदला ना बुराई से लेनाजो प्रभु ने दिया ने दिया संतोष लेकर
कुछ और मिले यह लोभ ना कर
लोभ का दीप जले मन मे पल एक नहीं जलने देना
जो कोई बुराई तेरी करें बदला ना बुराई से लेनाअपमान करें कोई तेरा सम्मान उसे ही तुम देना
जो कोई बुराई तेरी करें बदला ना बुराई से लेनापंकज प्रिंस
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कल किसने देखा कल आये या ना आये
कल किसने देखा कल आये या ना आये
आज की तू परवाह कर ले कही यह भी चला ना जाये
देख परायी चुपड़ी तेरा मन क्यों ललचा जाय
पास तेरे जो है तू उससे मन को समजाये
रुखा सूखा जो कुछ है कही वह भी छूट ना जाए
कल किसने देखा कल आये या ना आयेआज तेरा है जो वह कल था और किसी का
आने वाले कल मैं वह होगा और किसी का
फिर उस जगह पर अपना हक़ क्यों जताये
कल किसने देखा कल आये या ना आयेकरम किये जो तूने उसका फल भी यही मिलेगा
आज नहीं तो कल सब कुछ यही मिलेगा
बोया पेड़ बबूल का तो आम कहा से खाये
कल किसने देखा कल आये या ना आयेजैसी करनी वैसी भरनी रीति तो है यह पुरानी
अंत समय सब याद करते अपनी भूली कहानी
गुजर गया जो वक़्त अब लौट कभी ना आयेकल किसने देखा कल आये या ना आये
आज की तू परवाह कर ले कही वह भी चला जाएपंकज प्रिंस
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INQUIRY
HINDI MAIN POST KAISE HOGA, PLEASE JISE MALOON HO BTA DE
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Holi
HOLI
rango ki fuhar hai ya aapas ka yeh pyar hai
holi to yaarow hum sab ke prem ka tyohaar hairang birange chere sab ke par chadta na koi rang
kar door gile shikwe rahe sab ek dooje ke sang
durriyan mitata paas bulata saal ka yeh tyohar hai
holi to yaarow hum sab ke prem ka tyohaar haibikhri khushiyan ghar aangan main jo rang chale holi ka
jeeja sali ka khel yeh saath jaise daman choli ka
masti bhari holi yeh devar bhabhi ki bhi takrar hai
holi to yaarow hum sab ke prem ka tyohaar haigujhiya papad ki mahak hai nasha hai isme bhang ka
bachche bude kya jawan maja lete sab huddang ka
naach gaan dhol bhangda khusiyon ka yeh izhaar hai
holi to yaarow hum sab ke prem ka tyohaar haikheli humne bhi jo holi woh bhi kya holi thi
choote saathi jo aaj, kal unke saath toli thi
dil main base sab aise aaj bhi, janmo ka yeh pyar hai
holi to yaarow hum sab ke prem ka tyohaar hairango ki fuhar hai ya aapas ka yeh pyar hai
holi to yaarow hum sab ke prem ka tyohaar haiPANKAJ “PRINCE”