किताब हो जाओ

नेट के इस ज़माने में ऐ ” प्रेम ”
ख़ुद ही तुम इक किताब हो जाओ ….

पंकजोम ” प्रेम “

Comments

6 responses to “किताब हो जाओ”

  1. Panna Avatar

    बेहतरीन प्रेम जी

  2. पंकजोम " प्रेम " Avatar

    शुक्रिया पन्ना जी , शुक्रिया मिथिलेश दादा

  3. राम नरेशपुरवाला

    Good

  4. बहुत ही सुंदर पंक्तियां

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