सबकी कदर कर ले

बरस ना जाये फिर नैना , तू दिल मे कैद कही वो अब्र कर ले..

तो क्या हुआ , अगर कुछ ख्वाईसे पूरी ना हुई तेरी ….

तू अधूरी ख्वाईसों संग पूरा ये सफ़र कर ले…

 

रिश्तो की रस्में दिल से निभा .

शामिल उनकी हर ख़बर में , अपनी ख़बर कर ले…

 

जीते ज़ी का हैं सब झमेला …

तू क़दरदान बन , सबकी कदर कर ले…..

 

खामोश लफ्ज़ो में छिपी हैँ एक ख़ुशी …..

तू वो ख़ुशी महसूस करने , थोड़ा सब्र कर ले…

 

आगे का सफ़र थोड़ा तन्हा कटेगा…

इत्मीनान से कटे , तो थोड़ी फ़िक्र कर ले…..

 

पता हैं क़ायनात को तेरे साग़र – ए – इश्क़ का …..

तू इज़हार करने , बेताब दिल की  एक – एक लहर कर ले….

 

 

अकेलेपन की चिंगारी दे रही है दस्तक ” पंकजोम प्रेम “….

इसके आग बनने से पहले ,  महफूज़  उसके साथ का नगर कर ले .

Comments

8 responses to “सबकी कदर कर ले”

  1. Sumit Nanda Avatar
    Sumit Nanda

    आगे का सफ़र थोड़ा तन्हा कटेगा…
    इत्मीनान से कटे , तो थोड़ी फ़िक्र कर ले…..bahut khoob kaha aapne

  2. Pankaj Soni Avatar
    Pankaj Soni

    Sukkriyaaa sumit ji n anupriya ji…

  3. Panna Avatar
    Panna

    bahut achi kavita…hirday shaparshi

  4. Anjali Gupta Avatar
    Anjali Gupta

    no words to express my feelings for the poem…really great!

  5. Pankaj Soni Avatar
    Pankaj Soni

    Sukkriyaa anjali ji n panna bhai

  6. Satish Pandey

    आगे का सफ़र थोड़ा तन्हा कटेगा…

    इत्मीनान से कटे , तो थोड़ी फ़िक्र कर ले
    वाह वाह

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