मेरा कुछ भी लिखना…प्रभु जी
तुमसे अर्चना का उपहार..
करना होता है…
अपने शब्दों से तुम्हे पुकारना…
तुम्हे याद करना होता है….
Author: Pragya Shukla
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जय हो
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श्रीराम
गुलशन तो तू है मेरा
बहारों का मैं क्या करूँनैनों मैं बस गए हो तुम श्रीराम
नज़ारों का मैं क्या करूँ .. -
Yakeen
सपने भी हकीकत मे बदल सकते है।
छूटे हुये लोग फिर से मिल सकते है।।
गर हौसला है और खुदा पर यकीन ।
तो रेगिस्तान मे भी फूल खिल सकते है।
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Takleef
होगा दर्द कोई तो हम ही याद आयेंगे।
तकलीफ मे आपको हम ही नजर आयेंगे।।
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मनोरथ
बिन मेहनत मनोरथ पूर्ण न होगे।
प्रभु की कृपा से सब काज सफल होगे।।
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परहित
माना मौत से सबको डर लगता है,
पर बुरे काम करने से परहेज नही है।
परहित करके देखो शान्ति मिलती है,
न हुआ फायदा तो कोई नुकसान भी नही है।।
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हौसला
कश्तियाँ नही हौसला तो हमारे पास है।
कह दो स्वम्भू खुदाओं से….ऊपर वाला मेरे साथ है।।
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Samay
समय पर सीख लो रिश्ते निभाने।
वरना हो जाओगे बिल्कुल बीराने।।
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गलती
हो सके प्रभु तो मेरे गुनाहो को माफ कर देना।
इन्सान हूँ गलतियां होना तो लाजमी ही है।।
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आशीर्वाद
सुबह होते ही प्रभू चरणो की आस होती है।
आशीर्वाद की दौलत ही मेरे पास होती है।।
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दर्द सोया है
रात से कह दो कि थोड़ा थम कर गुजर।
आज बहुत दिनो बाद आज दर्द सोया है।।
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रंग
पल पल बदलते है लोग रंग।
फिर भी पूछते है…..
कि होली कब है??? -
लब्ज
कर न सको सम्मान तो किसी को घर बुलाया न करो।
दो लब्ज बोलने मे निकलती है जान…. तो सामने आया न करो।। -
Langar
देकर निमन्त्रण पत्र वो स्वतन्त्र से हो गये।
क्या कायदा है जमाने का… कागज पर ही मर मिटे।तो लब्ज बोलना मुनासिब न समझा,निमन्त्रण नही….लगता लंगर का पैगाम दे गये।
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फर्ज
जन्नत नसीब न होगी गर कर्तव्य पालन न किया।
मनुष्य होकर जो मानवता का फर्ज अदा न किया।।
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दिल दुखाना
हुआ है मन मे संताप तो अब क्या फायदा?
माँ बाप का दिल दुखाकर मिले गर खुशी….
तो उस खुशी का क्या फायदा??? -
मानवता
हमदर्दी की चादर अब सुकुड़ सी गयी है।
मानवता और दया अब कुछ पड़ गयी है।।
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Awataar
कल्कि का धर अवतार प्रभुजी धरा पर आ जाओ।
बढ़ गया है पाप आप आकर इसे मिटा जाओ। -
स्वाद
बड़े होटलो मे खाने वाले चूल्हे के खाने का स्वाद क्या जाने।
वो तो बावर्ची पर है टिके,घर के खाने का स्वाद क्या जाने।। -
Soch
हमे क्या मालूम?यह कहकर लोग मुद्दों से भटक जाते है।
पर हम जैसे इन्ही बातों की सोच मे पड़े रह जाते है।।
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धन्यवाद
धन्यवाद कहना भी कितना आसान होता है।
इससे छोटा सा गुनाह आसानी से माफ होता है।। -
Dawat
दावत तो देते है जैसे हमारे इंतजार मे ही बैठे हो।
पर चौखट पर कदम रखते ही फिर क्यूं मुंह मोड़ लेते है???
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मेरा दर्द
मेरा क्या दर्द सहकर भी जिन्दा रह लूँगा
वो क्या करेगी जिसे मुझ बिन हँसना न आता।
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रिश्तें
जीना है तो गम भूलने ही पडेंगे
दूर रहकर भी सारे रिश्ते निभाने ही पड़ेंगे।
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आँसू
जीना है अगर तो खुद को खुश रखना सीखो
हजारो है यहाँ आपको आँसू देने वाले
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उड़ना
फूलो को क्या अब महकना सीखना
पानी को क्या कब प्यासा रहना
पंछी हूँ मै खुले आसमान का
मुझे क्या अब उड़ना सीखना।।
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Suna hai
सुना है कोई आया है मेरा हाल पूछने
उनसे कह दो मै ठीक हो गया हूँ
जब किसी ने इतना वक़्त निकाला है मेरे लिये
देखकर उन्हे अब चैन आ जायेगा
दीदार से उनको मुझे सब्र मिल जायेगा।।
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Sapne
जमाने की बाते क्या करुँ सब अपने मे व्यस्त रहते है।
सपनो को पूरा करने को हर पल जगते रहते है।।
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Shanti
सुबह सवेरे अब तो कोलाहल होता है।
आधुनिकता मे शान्ति कहा मिलती है।
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गजब है
गजब एहसास है
तुम्हारे पास होने का
दूर जाने का गम भी कम नहीं
तुम्हारी महक आज भी
महसूस होती है
जैसे सूखे फूलों में बास आती है -
सिलसिला
सिलसिला यूँ ही चलता रहे
मुलाकातों का
बीते ना पल यूं ही चलता रहे
तेरा मेरा मिलना बिछड़ना
फिर मिलना और हमेशा के लिए बिछड़ जाना -
तुम्हारे पास
तुम्हारे पास दास्तां सुनने
को वक्त नहीं….
तो हमारे पास भी
कहने को कोई लफ्ज़ नहीं….अगर बसा लिया है
तूने गैरों को घर में
तो मेरे दिल में भी
तू कमबख्त नहीं ….वो और होते होंगे
इश्क में मर मिटने वाले
मैं तेरे प्यार में कटूंगी
अपनी नब्ज़ नहीं….तू चाहता होगा
तेरे लिए खुद को
मै बदल दूंगी तो
इतनी नासमझ मैं कमबख्त नहीं …तू सुई मैं धागा बन
सिल रही थी ज़ख्म
तेरी चुभन से होता था
मुझको कष्ट नहीं…..थे गलीचे सुखाने कुछ
गलतफहमियों के वर्ना
तेरे आंगन में रखते हम
कदम सख्त नहीं…. -
फूलों में महक
फूलों में महक है
कागज़ में अल्फ़ाज़
आसमान में तारे टिमटिमा रहे हैं
दिल में उतर आया है चांद।
और बरस रहा है सावन
कितनी ही यादें ताज़ा हो गई हैं -
बहुत हो गया अब
लफ्जों को कविता में
पिरोते जा रहे हैं
जज्बातों को सहेज कर
रखते जा रहे हैं ।
बहुत हो गया अब
मरने का सामान
चलो छोड़ दिया तुम्हें
अब जीने जा रहे हैं -
तू ही तो था
तू ही तो था वो कन्धा
जिस पर सिर रख
रो लेती थी।
तू ही तो था यार
मेरा जिसको
कान्हा मैं कहती थी -
उसका चेहरा
उसका चेहरा ही नज़र
आता है देखूँ मैं जिधर
वो रूबरू आता है
मुझे अक्सर नज़र -
मेरी बदकिस्मती
मेरी बदकिस्मती थी
जो तुम ना मिले
मैंने तुम्हें ढूंढा है मूंगफली के दाने की तरह। -
कितनी ताकत
है कितनी ताकत तुझमें
मुझे तोड़ने की बता तू मुझे
मै हद देखना चाह्ती हूँ
तेरे गिरने की। -
हम रोए हैं
उनसे बिछड़ कर हम रोए हैं
देखना चाहिए क्या वह भी रोए -
बेखयाली
दिल की अठखेलियां और अंगड़ाइयाँ
धीमे-धीमे बढ़ती जा रही हैं
उम्र चांदनी की तरह घटती जा रही है
तुम्हें होश है कि नहीं
अब सितम करना बंद कर
बेखयाली में भी खयाल आता है तेरा
तू दिल से खेलना बंद कर। -
आंखों के सामने
आँखों के सामने बैठे हुए हैं
सिर झुकाए हुए
शायद उन्हें एहसास है
मेरे साथ किये
जुल्म सितम का। -
मोहलत
मोहलत की जरुरत थी
थोड़ा सा इंतजार कर लेते
बहुत कुछ सोंचा था
तुम्हारे लिये हमनें। -
ह्रदय विहीन
जरा देखूं तो सही
तुम्हारे दिल में उतर कर
दिल है अभी या दिल है ही नहीं
दिल है तो उसमें पत्थर हैं
या मांस के कुछ लोथड़े भी हैं
एहसास है या है ही नहीं
मैं हूं या हूं ही नहीं
या हृदय विहीन हो तुम
जो मुझसे प्यार नहीं
मेरा एहसास नहीं
कोई जज्बात नहीं
जरा देखूँ तो सही
तुम्हारे दिल में उतर कर
मैं हूं या मैं हूं ही नहीं। -
ह्रदय विहीन
जरा देखूं तो सही
तुम्हारे दिल में उतर कर
दिल है अभी या दिल है ही नहीं
दिल है तो उसने पत्थर है
या मांस के कुछ लोथड़े भी हैं
एहसास है या है ही नहीं
मैं हूं या हूं ही नहीं
या हृदय विहीन हो तुम
जो मुझसे प्यार नहीं
मेरा एहसास नहीं
कोई जज्बात नहीं
जरा देखूँ तो सही
तुम्हारे दिल में उतर कर
मैं हूं या मैं हूं ही नहीं। -
नीली छतरी
नीली छतरी कुर्ता
ढीला ढीला पहनकर पजामा
निकला वह छैल छबीला……
हाथ में गुब्बारे और बच्चे
प्यारे-प्यारे पीछे पीछे
उसके दौड़े जा रहे थे……
थोड़ा सा बूढ़ा
पर होठों पर मुस्कान
हाथों में खिलौने और गुब्बारे…..
की रंगीन दुकान
उसने जोर से आवाज लगाई
रंग बिरंगे गुब्बारे ले लो
लेकर आया हूं तुम सारे ले लो….. -
गुलाबी आसमान
गुलाबी आसमान
ख़्वाब धुंधले से
धुआं धुआं है चारों तरफ
कोई उम्मीद भी दिखाई नहीं देती
तुझे सुधारने की हर कोशिश
नाकाम ही रही
तूने कभी भी कोशिश ही नहीं की
मुझे समझने की
या शायद तुझ में
वो काबिलियत ही नहीं
जो तुम मुझे समझ पाते -
आंसुओं से नहा कर
आंसुओं से नहा कर
धूप का चंदन घिस कर
तेरे प्रेम का उबटन लगाकर
उजली तो थी ही और निखर भी गई -
कयामत से पहले
कयामत से पहले
तेरा चांद देखना चाहते हैं
सितारों के जुगनू खुद में
समेटना चाहते हैं
आसमान जैसा मेरा दिल
ज़मी है तू मेरी हम तुझमें उतरना चाहते हैं। -
छुप कर
छुप कर आंसू बहाते हैं
रो-रोकर जातेहैं
सपने मेरे तड़पकर टूटते
जा रहे हैं या खुदा हम तेरे पास आ रहे हैं -
सफ़र
सफ़र की शाम हो गई
ज़िन्दगी की आरज़ू में
मौत बदनाम हो गई ।