गुलशन तो तू है मेरा बहारों का मैं क्या करूँ नैनों मैं बस गए हो तुम श्रीराम नज़ारों का मैं क्या करूँ ..
गुलशन तो तू है मेरा बहारों का मैं क्या करूँ नैनों मैं बस गए हो तुम श्रीराम नज़ारों का मैं क्या करूँ ..
सपने भी हकीकत मे बदल सकते है। छूटे हुये लोग फिर से मिल सकते है।। गर हौसला है और खुदा पर यकीन । तो रेगिस्तान मे भी फूल खिल सकते है।
होगा दर्द कोई तो हम ही याद आयेंगे। तकलीफ मे आपको हम ही नजर आयेंगे।।
बिन मेहनत मनोरथ पूर्ण न होगे। प्रभु की कृपा से सब काज सफल होगे।।
माना मौत से सबको डर लगता है, पर बुरे काम करने से परहेज नही है। परहित करके देखो शान्ति मिलती है, न हुआ फायदा तो कोई नुकसान भी नही है।।
कश्तियाँ नही हौसला तो हमारे पास है। कह दो स्वम्भू खुदाओं से….ऊपर वाला मेरे साथ है।।
समय पर सीख लो रिश्ते निभाने। वरना हो जाओगे बिल्कुल बीराने।।
हो सके प्रभु तो मेरे गुनाहो को माफ कर देना। इन्सान हूँ गलतियां होना तो लाजमी ही है।।
सुबह होते ही प्रभू चरणो की आस होती है। आशीर्वाद की दौलत ही मेरे पास होती है।।
रात से कह दो कि थोड़ा थम कर गुजर। आज बहुत दिनो बाद आज दर्द सोया है।।
पल पल बदलते है लोग रंग। फिर भी पूछते है….. कि होली कब है???
कर न सको सम्मान तो किसी को घर बुलाया न करो। दो लब्ज बोलने मे निकलती है जान…. तो सामने आया न करो।।
देकर निमन्त्रण पत्र वो स्वतन्त्र से हो गये। क्या कायदा है जमाने का… कागज पर ही मर मिटे। तो लब्ज बोलना मुनासिब न समझा,निमन्त्रण नही….लगता लंगर का पैगाम दे गये।
जन्नत नसीब न होगी गर कर्तव्य पालन न किया। मनुष्य होकर जो मानवता का फर्ज अदा न किया।।
हुआ है मन मे संताप तो अब क्या फायदा? माँ बाप का दिल दुखाकर मिले गर खुशी…. तो उस खुशी का क्या फायदा???
हमदर्दी की चादर अब सुकुड़ सी गयी है। मानवता और दया अब कुछ पड़ गयी है।।
कल्कि का धर अवतार प्रभुजी धरा पर आ जाओ। बढ़ गया है पाप आप आकर इसे मिटा जाओ।
बड़े होटलो मे खाने वाले चूल्हे के खाने का स्वाद क्या जाने। वो तो बावर्ची पर है टिके,घर के खाने का स्वाद क्या जाने।।
हमे क्या मालूम?यह कहकर लोग मुद्दों से भटक जाते है। पर हम जैसे इन्ही बातों की सोच मे पड़े रह जाते है।।
धन्यवाद कहना भी कितना आसान होता है। इससे छोटा सा गुनाह आसानी से माफ होता है।।
दावत तो देते है जैसे हमारे इंतजार मे ही बैठे हो। पर चौखट पर कदम रखते ही फिर क्यूं मुंह मोड़ लेते है???
मेरा क्या दर्द सहकर भी जिन्दा रह लूँगा वो क्या करेगी जिसे मुझ बिन हँसना न आता।
जीना है तो गम भूलने ही पडेंगे दूर रहकर भी सारे रिश्ते निभाने ही पड़ेंगे।
जीना है अगर तो खुद को खुश रखना सीखो हजारो है यहाँ आपको आँसू देने वाले
फूलो को क्या अब महकना सीखना पानी को क्या कब प्यासा रहना पंछी हूँ मै खुले आसमान का मुझे क्या अब उड़ना सीखना।।
सुना है कोई आया है मेरा हाल पूछने उनसे कह दो मै ठीक हो गया हूँ जब किसी ने इतना वक़्त निकाला है मेरे लिये देखकर उन्हे अब चैन आ जायेगा दीदार से उनको मुझे […]
जमाने की बाते क्या करुँ सब अपने मे व्यस्त रहते है। सपनो को पूरा करने को हर पल जगते रहते है।।
सुबह सवेरे अब तो कोलाहल होता है। आधुनिकता मे शान्ति कहा मिलती है।
गजब एहसास है तुम्हारे पास होने का दूर जाने का गम भी कम नहीं तुम्हारी महक आज भी महसूस होती है जैसे सूखे फूलों में बास आती है
सिलसिला यूँ ही चलता रहे मुलाकातों का बीते ना पल यूं ही चलता रहे तेरा मेरा मिलना बिछड़ना फिर मिलना और हमेशा के लिए बिछड़ जाना
तुम्हारे पास दास्तां सुनने को वक्त नहीं…. तो हमारे पास भी कहने को कोई लफ्ज़ नहीं…. अगर बसा लिया है तूने गैरों को घर में तो मेरे दिल में भी तू कमबख्त नहीं …. वो […]
फूलों में महक है कागज़ में अल्फ़ाज़ आसमान में तारे टिमटिमा रहे हैं दिल में उतर आया है चांद। और बरस रहा है सावन कितनी ही यादें ताज़ा हो गई हैं
लफ्जों को कविता में पिरोते जा रहे हैं जज्बातों को सहेज कर रखते जा रहे हैं । बहुत हो गया अब मरने का सामान चलो छोड़ दिया तुम्हें अब जीने जा रहे हैं
तू ही तो था वो कन्धा जिस पर सिर रख रो लेती थी। तू ही तो था यार मेरा जिसको कान्हा मैं कहती थी
उसका चेहरा ही नज़र आता है देखूँ मैं जिधर वो रूबरू आता है मुझे अक्सर नज़र
मेरी बदकिस्मती थी जो तुम ना मिले मैंने तुम्हें ढूंढा है मूंगफली के दाने की तरह।
है कितनी ताकत तुझमें मुझे तोड़ने की बता तू मुझे मै हद देखना चाह्ती हूँ तेरे गिरने की।
उनसे बिछड़ कर हम रोए हैं देखना चाहिए क्या वह भी रोए
दिल की अठखेलियां और अंगड़ाइयाँ धीमे-धीमे बढ़ती जा रही हैं उम्र चांदनी की तरह घटती जा रही है तुम्हें होश है कि नहीं अब सितम करना बंद कर बेखयाली में भी खयाल आता है तेरा […]
आँखों के सामने बैठे हुए हैं सिर झुकाए हुए शायद उन्हें एहसास है मेरे साथ किये जुल्म सितम का।
मोहलत की जरुरत थी थोड़ा सा इंतजार कर लेते बहुत कुछ सोंचा था तुम्हारे लिये हमनें।
जरा देखूं तो सही तुम्हारे दिल में उतर कर दिल है अभी या दिल है ही नहीं दिल है तो उसमें पत्थर हैं या मांस के कुछ लोथड़े भी हैं एहसास है या है ही […]
जरा देखूं तो सही तुम्हारे दिल में उतर कर दिल है अभी या दिल है ही नहीं दिल है तो उसने पत्थर है या मांस के कुछ लोथड़े भी हैं एहसास है या है ही […]
नीली छतरी कुर्ता ढीला ढीला पहनकर पजामा निकला वह छैल छबीला…… हाथ में गुब्बारे और बच्चे प्यारे-प्यारे पीछे पीछे उसके दौड़े जा रहे थे…… थोड़ा सा बूढ़ा पर होठों पर मुस्कान हाथों में खिलौने और […]
गुलाबी आसमान ख़्वाब धुंधले से धुआं धुआं है चारों तरफ कोई उम्मीद भी दिखाई नहीं देती तुझे सुधारने की हर कोशिश नाकाम ही रही तूने कभी भी कोशिश ही नहीं की मुझे समझने की या […]
आंसुओं से नहा कर धूप का चंदन घिस कर तेरे प्रेम का उबटन लगाकर उजली तो थी ही और निखर भी गई
कयामत से पहले तेरा चांद देखना चाहते हैं सितारों के जुगनू खुद में समेटना चाहते हैं आसमान जैसा मेरा दिल ज़मी है तू मेरी हम तुझमें उतरना चाहते हैं।
छुप कर आंसू बहाते हैं रो-रोकर जातेहैं सपने मेरे तड़पकर टूटते जा रहे हैं या खुदा हम तेरे पास आ रहे हैं
सफ़र की शाम हो गई ज़िन्दगी की आरज़ू में मौत बदनाम हो गई ।
जुस्तजू की और खो बैठे चैन और करार आते हैं सपनें उसके बार-बार
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