ह्रदय विहीन

जरा देखूं तो सही
तुम्हारे दिल में उतर कर
दिल है अभी या दिल है ही नहीं
दिल है तो उसमें पत्थर हैं
या मांस के कुछ लोथड़े भी हैं
एहसास है या है ही नहीं
मैं हूं या हूं ही नहीं
या हृदय विहीन हो तुम
जो मुझसे प्यार नहीं
मेरा एहसास नहीं
कोई जज्बात नहीं
जरा देखूँ तो सही
तुम्हारे दिल में उतर कर
मैं हूं या मैं हूं ही नहीं।

Comments

22 responses to “ह्रदय विहीन”

  1. मार्मिक रचना

  2. Priya Choudhary

    Good 👏👏👏

  3. दिल के टूटने का भी, क्या मातम मनाइए
    किस को है सारोकार, ज़रा कम मनाइए

    1. वाह सुन्दर

  4. 😂😂😂😂🤣😂😂😂😂😂😂😂

  5. ह्रदयस्पर्शी है खूबसूरत

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