सुबह के सूर्य को अभिनन्दन
देवों के देव को अभिनन्दन ।
है अपनी जीत को अभिनन्दन
है अपनी हर को अभिनन्दन ।
Author: Pragya Shukla
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अभिनन्दन
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ये मौसम सुहाना
ये मौसम सुहाना
फिजा भीगी
तेरी यादें हैं छायी
काले बादल
हों जैसे। -
आदत
हमारी आदत नही है
यूं ही किसी की
तारीफें करना
तुम हो ही इतने
अच्छे की हम
शायर हो गये। -
खुशियाँ
अब तो बन गई किस्मत
जब से मिल गयीं ख़ुशियाँ -
सर्दियों की धूप-सी
सर्दियों की धूप सी
लग रही है यह घड़ीयह जो नया एहसास है
अजनबी है अजनबीसुना है मन वीरान है
मेरा जहां आज क्यूंयादों में है डूबा दिल
ना आ रहा है बाज क्यूंनजरें कर रही है इज़हार
दिल में दबा है राज क्यूंकहने थे जो लफ्ज़
बदला है हर अल्फाज क्यूंसर्दियों की धूप में भी
इतनी धुंध छाई आज क्यूँसर्दियों ने ओढ़ ली है
धूप की चादर अभीधूप है आँगन में उतरी
बन के दुल्हन आज क्यूँधीमी-धीमी उजली-उजली
महकती है आज क्यूँये गुलाबी सर्दियाँ भी
मन को हैं कितना लुभातीकोहरे में कांपते हैं
आज मेरे हाँथ क्यूँमन पर है छाई उदासी
इतने अर्से बाद क्यूँ ।