Author: Rajeev Ranjan

  • Kanhaiya

    माखन निकाल रही यशोदा मैया
    ध्यान में है सिर्फ श्याम कन्हैया

    भूखे जब होंगे बाल गोपाल
    तब दूंगी उन्हें माखन निकाल
    अभी रख देती हूं इसे संभाल
    मन में है हरदम उन्हीं का ख्याल

    हरि भी देख रहे मां को छुप-छुप के
    माखन तो प्रिय मेरे सारे सखाओं के
    देर लगेगी मां को अभी थोड़ा
    इसलिए चल दिए पड़ोस में चुपके

    दही की कमी नहीं है गोकुल में
    श्याम बसे जन-जन के मन मन में
    मनमोहक कृत्य सखा संग माधव के
    मन में गोपियां रख सकी न संभाल

    मां सोचे घर में कमी नहीं माखन की
    फिर राह तके कान्हा औरन के घर की
    मन फंसा दुविधा में तभी गोपियां लायी
    मोहन को माखन लपटाए मुंह व भाल

    हजम कैसे करे मां शिकायत लाल की
    उनको तो चिंता बस बाल मान की
    जो हैं प्यारे न्यारे सारे जग के दुलारे
    उनको कैसे कोई रखे आंचल में संभाल

  • माधव

    माखन निकाल रही यशोदा मैया
    ध्यान में है सिर्फ श्याम कन्हैया

    भूखे जब होंगे बाल गोपाल
    तब दूंगी उन्हें माखन निकाल
    अभी रख देती हूं इसे संभाल
    मन में है हरदम उन्हीं का ख्याल

    हरि भी देख रहे मां को छुप-छुप के
    माखन तो प्रिय मेरे सारे सखाओं के
    देर लगेगी मां को अभी थोड़ा
    इसलिए चल दिए पड़ोस में चुपके

    दही की कमी नहीं है गोकुल में
    श्याम बसे जन-जन के मन मन में
    मनमोहक कृत्य सखा संग माधव के
    मन में गोपियां रख सकी न संभाल

    मां सोचे घर में कमी नहीं माखन की
    फिर राह तके कान्हा औरन के घर की
    मन फंसा दुविधा में तभी गोपियां लायी
    मोहन को माखन लपटाए मुंह व भाल

    हजम कैसे करे मां शिकायत लाल की
    उनको तो चिंता बस बाल मान की
    जो हैं प्यारे न्यारे सारे जग के दुलारे
    उनको कैसे कोई रखे आंचल में संभाल

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