ज़मीन मुझको समझ कर खुद आसमान लिखा था उसने, मैं था परिंदा वगैर परवाला खुद को उड़ान लिखा था उसने, मौत को देखा है मैं करीब से अपने मुझको पुतला खुद में Jaan लिखा था […]

रोशनी दिन मे थी अंधेरी शाम लिखा था उसने, वाकिब मैं था जैसे खुद को अंजान लिखा था उसने, नज़रे पलट ली निगाहों से अपने मुझको मिट्टी खुद को शान लिखा था उसने, अरे बेवफा […]

कभी ना हो सके जिसका खात्मा, ऐसा इम्तिहान लिखा था उसने। वर्षों की दुश्मनी थी जैसे ऐसा, इंतेकाम लिखा था उसने।। अधूरी कहानी अधूरी मोहब्बत अधूरी जिंदगी में, मैं खुश हूँ खुद परेशान लिखा था […]

मंजिल मेरी वो मुझको श्मशान लिखा था उसने, है गरीब खुद ऐसा खानदान लिखा था उसने। रहता मै पक्के घरों में अब(पहले खपरैल मे रहते थे), झोपड़ी में है वो ऐसा मकान लिखा था उसने।। […]

मुहब्बत न मिटने का पैगाम लिखा था उसने, इश्क़ तुमसे है एसा अंजाम लिखा था उसने । बेवफा हूँ मैं ऐसा सोच कर वो , हाथों पे किसी और का नाम लिखा था उसने। Please […]

मैं वो तस्वीर नहीं जो आइने से गुजर जाता हूँ खुश्बू भी नहीं जो लोगो मे बिखर जाता हूँ बिखरती हैं शामे दिन निकलने से पहले मै शायरी हूँ जो हर पन्ने पे उतर जाता […]