Author: Rajneesh Kannaujiya

  • Khwahish

    Teri aankhe jaise koi samndar lagta hai
    Mai rah jau yesa ghar lagta hai

  • वही पुरानी तसल्ली

    खूब निभाया था जिसने वो मुश्किल की बात थी
    मिला मुकद्दर मे जो मेरे meri औकात थी
    Rajjneesh

  • वही पुरानी तसल्ली

    वो जो कमी थी मैं काबिल न हुआ,
    मेरे नसीब मे मुहब्बत कभी काबिल न हुआ।
    Rajjneesh

  • वही पुरानी तसल्ली

    तेरे मुहब्बत मे न जाने कितने तराने थे,
    मै आशिक था जब तेरे फ़साने थे।

  • वही पुरानी तसल्ली

    सो जाते हैं जो सोचकर,
    उन्हे ख्वाब नहीं मिलता।
    जिनकी परछाइ होती है मुहब्बत,
    उन्हे जवाब नहीं मिलता।

  • वही पुरानी तसल्ली

    हुई थी खता हमसे,
    हमारा ही वो नजर था
    रखा था कदम जिस गली मे, वो गली ही उनका शहर था।
    By Rajjneesh

  • वही पुरानी तसल्ली

    देखते हो उस शख्स को तुम,
    By जिसे तुम शाद करते हो।
    नाम मुहब्बत रहता है बस , Rajjneesh
    बाकी तुम बर्बाद करते हो।

  • वही पुरानी तसल्ली

    बहती है हवा रातों को,
    तो कभी चमकता सितारा होता है।
    होती है मोहब्बत जिसे बार बार,
    उसे बेवफ़ाई का सहारा होता है।
    By Rajjneesh

  • वही पुरानी तसल्ली

    फ़ुर्सत मिले तो पढ़ लिया करो 2 लाइने मेरे शायरी की,
    ये वो शायरी है जो कभी गलत नहीं होती।

  • वही पुरानी तसल्ली

    चलाता रहता हूँ बैठ के साख पे अपनी mobile,
    गर्मी है साहब पसीने से भीगना नहीं चाहता।
    Shayar Rajjneesh kann

  • वही पुरानी तसल्ली

    मुहब्बत है मुहब्बत का अंजाम बता दो,
    जिसे शायरी पसंद है वो अपना नाम बता दो।
    Shayar Rajjneesh kann

  • वही पुरानी तसल्ली

    खाक हुआ मेरा, तेरे फसाने मे।
    मै पागल हुआ, तेरी तस्वीर बनाने मे।
    Shayar Rajjneesh kann

  • वही पुरानी तसल्ली

    ज़मीन मुझको समझ कर खुद आसमान लिखा था उसने,
    मैं था परिंदा वगैर परवाला खुद को उड़ान लिखा था उसने,
    मौत को देखा है मैं करीब से अपने मुझको पुतला खुद में Jaan लिखा था उसने,
    मुझे सूखा Patra कह कर खुद को जहान लिखा था उसने ,
    अरे Bewafa हूं मैं ऐसा सोच कर हाथों पे किसी और का Naam लिखा था उसने,
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    Shayar Rajjneesh kann

  • वही पुरानी तसल्ली

    रोशनी दिन मे थी अंधेरी शाम लिखा था उसने,
    वाकिब मैं था जैसे खुद को अंजान लिखा था उसने, नज़रे पलट ली निगाहों से अपने मुझको मिट्टी खुद को शान लिखा था उसने,
    अरे बेवफा हूँ ऐसा सोच कर अपने हाथों पे किसी और का नाम लिखा था उसने।।
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    Shayar Rajjneesh kann

  • वही पुरानी तसल्ली

    कभी ना हो सके जिसका खात्मा, ऐसा इम्तिहान लिखा था उसने।
    वर्षों की दुश्मनी थी जैसे ऐसा, इंतेकाम लिखा था उसने।।
    अधूरी कहानी अधूरी मोहब्बत अधूरी जिंदगी में,
    मैं खुश हूँ खुद परेशान लिखा था उसने।।
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    Shayar Rajjneesh kann

  • वही पुरानी तसल्ली

    मंजिल मेरी वो मुझको श्मशान लिखा था उसने,
    है गरीब खुद ऐसा खानदान लिखा था उसने।
    रहता मै पक्के घरों में अब(पहले खपरैल मे रहते थे),
    झोपड़ी में है वो ऐसा मकान लिखा था उसने।।
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    Shayar Rajjneesh kann

  • वही पुरानी तसल्ली

    मुहब्बत न मिटने का पैगाम लिखा था उसने,
    इश्क़ तुमसे है एसा अंजाम लिखा था उसने ।
    बेवफा हूँ मैं ऐसा सोच कर वो ,
    हाथों पे किसी और का नाम लिखा था उसने।
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    Shayar Rajjneesh kann.

  • वही पुरानी तसल्ली

    हम साये थे तेरे मंजिल ए इश्क के, फितूर कोई लाया होगा।
    मुकाबिल न थे हम तेरे, तुम्हें तो आशिको ने बुलाया होगा।
    Shayar Rajjneesh kann.
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  • वही पुरानी तसल्ली

    आशिक थे उसके, तो जिक्र और पहचान थी हमारी,
    उसकी खुशी में ही, तो jaan थी हमारी।

  • वही पुरानी तसल्ली

    कोई साथी नहीं अपना, बेगाने लाख होते हैं ,
    जो होते हैं दिलो के आग, वही तो राख होते हैं।

  • वही पुरानी तसल्ली

    न तुम थे न हम थे न वो बात रही,
    न ये रुतबा मिला न वो औकात रही ।

  • वही पुरानी तसल्ली

    कोई साथी नहीं अपना, बेगाने लाख होते हैं ,
    जो होते हैं दिलो के आग, वही तो राख होते हैं।

  • शायर Rajneeshy

    मैं वो तस्वीर नहीं जो आइने से गुजर जाता हूँ
    खुश्बू भी नहीं जो लोगो मे बिखर जाता हूँ
    बिखरती हैं शामे दिन निकलने से पहले
    मै शायरी हूँ जो हर पन्ने पे उतर जाता हूँ

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