Sanjay Narayan Nectar's Posts

पाँव फिर से जी उठे हैं

जब मिलीं दो युगल आँखें अधर पर मुस्कान धर के। गा उठे टूटे हृदय के भ्रमर मधुरिम तान भर के। सर झुकाकर दासता स्वीकार की अधिपत्य ने। गर्मजोशी जब परोसी अतिथि को आतिथ्य ने। यूँ लगा रूखे शहर में गाँव फिर से जी उठे हैं। 🌺🌺🌺🌺🌺🌺🌺🌺 किंशुकों की कल्पना में कंटकों से घिर चुके थे। पत्थरों की ठोकरों से लड़खड़ाकर गिर चुके थे। सोंचकर छिलने की पीड़ा घाव डरने से लगे थे। फिर सफर के प्रबल आशा भाव मरने से लगे थे। तुम बने आल... »

कोई नहीं महान बना है

फूलों के बिस्तर पर जन्मा पला बढ़ा उल्लासों में । जिसको प्रचुर मिली सुविधाएं डूबा भोग विलासों में । है भूमिका भाग्य की लेकिन अथक परिश्रम किए बिना, कोई नहीं महान बना है अब तक के इतिहासों में । बड़े बड़ों के साथ खड़े होने में क्या महानता है ? हृदय तुच्छ तो हाथ बड़े होने में क्या महानता है ? है आकलन तुम्हारा इससे , किस पथ पड़ते पांव युगल ; जिस सीमा तक संकट सहते, मानो उसे वास्तविक बल ; गुणहीनों के गुणगान... »

दुनियाँ तो जहरीली है

सोंच समझकर कदम बढ़ाओ राह बहुत पथरीली है। साथी मीठे सुर गुंजाओ, दुनियाँ तो जहरीली है।। ख़ुशी परायी देख ख़ुशी से किसका हृदय मचलता है। कौन हृदय है जिसके भीतर प्रेम- पपीहा पलता है। बिना कपट के किस कोकिल के स्वर का जादू चलता है। स्वार्थ न हो तो तुम्हीं बताओ, किसकी कूक सुरीली है। साथी मीठे सुर गुंजाओ दुनियाँ तो जहरीली है।। मोहक कलियाँ मिल जाती हैं राहों में आते जाते। कुछ के अधर इशारा करते कुछ के नैना मुस्क... »

किया है प्यार

किया है प्यार तो इकरार से इन्कार क्या करना। है मरना शौक़ बचने का जतन बेकार क्या करना। तेरा आगोश ही मझधार बनकर गर डुबाता हो, तो आशिक़ दिल ये कहता है कि दरिया पार क्या करना। संजय नारायण »

जीवन भर यह पाप करूँगा

स्वयं टूटकर स्वयं जुडूँगा सब कुछ अपने आप करूँगा। विगत दिनों जो भूलें की हैं उनका पश्चाताप करूँगा।। मेरी त्रुटि थी किया भरोसा मैंने अपने यारों पर। समझ न पाया पग रख बैठा मैं जलते अंगारों पर। यदि स्नान पड़े करनी अब असहनीय पीड़ा के सर में करे विधाता दंड नियत यह किंचित नहीं विलाप करूँगा। विगत दिनों जो भूले की हैं उनका पश्चाताप करूँगा।। भेदभाव की फसल उगाकर धरा कहीं से धन्य नहीं है। ऊँच-नीच है धर्मकर्म तो ... »

पूजनीय शिक्षक

शिक्षक सम संसार में हितकारी ना कोइ। सकल सृष्टि के भाग्य का एक विधाता सोइ।। कहिए द्विज, शिक्षक, गुरु या कहिए उस्ताद। परमेश्वर को पूजिए गुरु पूजन के बाद।। लेकर गुरु की चरण- रज मस्तक तिलक रचाय। संजय ऐसे शिष्य पर शारद होयँ सहाय।। शिक्षक के सम्मान को पहुंचाए जो चोट। उस नेता के पक्ष में कभी न करना वोट।। बनता अगर कलेक्टर रहता धक्के खाय। बलिहारी माँ बाप की शिक्षक दियो बनाय।। खुद अध्ययन करता रहे, रहे बाँटत... »

Every single stone remains in calm

Someone, every moment, with a dagger in hand, Must have fear planted in mind’s land. Even after being struck by gusts of storms, Abode of my sentiments alters not in norms. There rests only one season of dejection there, Seeking guests like peace and solace everywhere. It’s because my ours made me split, The louder I scream the harder they hit. Truly every single stone remains in calm,... »

दुआ इतनी है

दुआ इतनी है कि रोज इस तरह भी बेशुमार आएं। दिन ढले तो बहार आए रात गुजरे तो बहार आए। घटाएँ चिलमन हैं खुशियाँ हैं रोशनी की किरण, घटाएँ ढलती रहें रोशनी के गुबार आएं। हमारी बात और है कि रहते हैं हम अंधेरों में, तुम उजाले हो क्यों न हमें तुम पर प्यार आए। कुछ समझ नहीं आता क्या बात है चेहरे में, देखें तो खुमार आए बिन देखे न करार आए। आज का दिन हो उल्फत का तरन्नुम हो साज हो, आज ही आज हो कल कभी कभार आए। जिंद... »

हमें भी पिलाइए

मेरे लबों की आप सदा बनके आइए। खुद जाम पीजिए, हमें भी पिलाइए। नज़रों में आपकी मयखाना नज़र आये। मखमूर क्यों न हो इनमें जो उतर जाए। मयकश की लाज रखिए तशरीफ़ लाइए। खुद जाम पीजिए हमें भी पिलाइए। जादू की कशिश हैं ये जलबों भरी अदायें। जुल्फों में भी हजारों महफूज हैं घटायें। छिटकाइए ये जुल्फ प्यास को बुझाइए। खुद जाम पीजिए हमें भी पिलाइए। खुशरंग गुलबहार है ये हुस्न आपका। बेदाग चाँद जैसा है चेहरा जनाब का। हो जा... »

पत्थरों की तरह आदतें हो गयीं

हम भी रोये नहीं मुद्दतें हो गयीं। पत्थरों की तरह आदतें हो गयीं। जबसे बेताज वह बादशाह बन गया, पगड़ियों पर बुरी नीयतें हो गयीं। जख्म भी दर्द देते नहीं आजकल, कम सितमगर तेरी रहमतें हो गयीं। खुशनुमां एक चेहरा दिखा ख्वाब में, तबसे जागे न हम मुद्दतें हो गयीं। थी खबर आदमी हैं उधर राह में, जो भी गुजरा उसे आफ़तें हो गयीं। एक मुफ़लिस था वो रोटियाँ माँगकर, झोलियाँ भर गया नेमतें हो गयीं। शौक जबसे अमीरी का चढ़ने लग... »