ज़हर इस तरह घुला जिंदगी में

ज़हर इस तरह घुला जिंदगी में
हर गूंठ में मुहं कढवा होता गया|
बारिशों का तो आना जाना नहीं अरसे से
सूखे से रिश्ता हमारा होता गया||

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3 responses to “ज़हर इस तरह घुला जिंदगी में”

    1. Sridhar Avatar
      Sridhar

      dhanyabaad

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