उन बेवा आंखों का आलम मत पूछो,
सूख गए हैं आंसू उन बेवा आंखों की ,
बसे थे जिनमें हजारों सपने,
टूट गए है वे सारे सपने,
बह गए हैं वे झरने सारे,
चले गए हैं दिन बहार के ,
अब तो सावन भी लगे सुखा सा ,
होली दिवाली में अब वो बात कहां ,
जीवन भी लगे सुना सुना सा ,
अब पहले जैसी बात कहां ,
सजना सवरना भी लगे गुनाह सा ,
हर पल किसी को ढूंढती है वो आंखें ……
Beba ankhe
Comments
5 responses to “Beba ankhe”
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Nice
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Thanks
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waahhh
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Thanks
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वाह बहुत सुंदर रचना
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