Category: शेर-ओ-शायरी

  • कहने को तो बस

    कहने को तो बस

         मेरे दिल ने , तेरे दिल पे

                 कुछ भरोसे ही तो किए थे

     शिकायत भी किस कचहरी करूँ

                    तेरे आस्मानी वादों की रसीदी टिकट पे

                                अरमानो के लहू से दस्तखत जो नही किए थे

                                                           

                                                                      …… यूई विजय शर्मा

  • मुक्तक 13

    चला जाता है कोई दूर ,दिल के पास रहता है ,
    वही यादें ,वही खुशबू ,वही एहसास रहता है .

    फ़कत इतना फरक है प्रेम के इन दो मिलापो में ,
    की जब वो दूर होते है तो ग़म ये साथ रहता है ..

    …atr

  • मुक्तक 12

    खत को मेरे संभाल के रखा जो होता मीर,
    हर हर्फ़ मेरे प्यार की दास्ताँ कहते .
    करे अब किस जगह रोशन गुलिश्ता ए जिगर को यार ,
    यहाँ तो आशियाँ ही लुट गया है मीर तूफां में .

    …atr

  • मुक्तक 11

    किया है खून रिश्तो का , तुम्हे कातिल कहूँ या भ्रम ,
    जला कर प्रेम का दीपक , अँधेरा कर दिया कायम .

    …atr

  • मुक्तक 10

    न देखोगे मुझे अब तुम , न अब संवाद होगा ..
    जो कल था ,आज तक जो था , न इसके बाद होगा ..

    …atr

  • मुक्तक 9

    लहरा रहा है सामने यादों का समंदर ,
    जो डूबना भी चाहूँ तो किस किनारे से..
    मेरे इश्क़ की दास्ताँ बस इतनी है,
    तलाश हमसफ़र की थी मुकाम तन्हाई का मिला.
    …atr

  • मुक्तक 8

    मुद्दत से तेरी आँखों में नमी नहीं देखी,
    लगता है तुमने मुझमे कोई कमी नहीं देखी ..
    यादों की लहरों पर किया है प्यार का सफर ,
    हमें है राब्ता उनसे उन्हें नहीं मेरी खबर..

    …atr

  • मुक्तक 7

    आँखों से झरते आंसू ने थमकर पूछा,
    आखिर सजा क्यों मिली मुझे ख़ुदकुशी की?
    दिल रो पड़ा पुराना जखम फिर हरा हुआ,
    कहा, गुनाह उसी ने किया जिस छत से तू गिरा ..
    ..atr

  • मुक्तक 6

    बर्बादी किसे दिखेगी हमारी जहाँ में मीर ,
    लुटने के बाद ग़म का खज़ाना जो पा लिया ..
    मुझको तेरी कमी तो सताती ही है मगर ,
    तू दूर जा के खुश है ये सुकून की बात है .

    …atr

  • मुक्तक 3

    खड़ी है जिंदगी फिर पूछती घर का पता क्या है,
    मुझे याद नहीं है मीर तू ही जाकर बता क्या है..
    बड़ी मुश्किल है बेचारी किधर जाये ख़बर क्या है?
    कभी वो पूछती है फिर इधर क्या है? उधर क्या है?
      …atr
  • मुक्तक2

    हो गयी मुद्दत  तुम्हारे सामने आया ही नहीं ,
    है मगर सच ये कभी तुमने बुलाया ही नहीं.
    अब तो सांसो पर मेरे पहरा तुम्हारा ही रहे,
    है राज़ कि बातें,तेरे बिन एक पल बिताया भी नहीं.
      …atr
  • मुक्तक 1

    मोहब्बत के सवालों से मैं अक्सर अब मुकर जाता ,

    कहीं बातो ही बातों में मैं कुछ कहकर ठहर जाता.. 

    कि तेरा नाम भूले से जबां तक आ गया ग़र तो,

    तू बदनाम हो जाये न इससे मैं सिहर जाता …

        …atr
  • तुम्हारे लिए..

    अगर तुम बन गयी दीपक तुम्हारी लौ बनूँगा मैं,
    नदी के शोर में शायद तुम्हारी धुन सुनूंगा मैं.
    तुम्हारी याद में अक्सर यहाँ आंसू  टपक पड़ते,
    ये मोती है मेरे प्रीतम मगर कब तक गिनूंगा मैं…
    ..atr

  • कहीं हमको भी जाना है..

    तू ही दौलत मेरे दिल कि तू ही मेरा खज़ाना है,
    मेरे दिल में मेरे साक़ी तेरा ही गुनगुनाना है.
    चलो अब देखते है फिर मुलाक़ातें कहाँ होंगी ,
    कहीं तुमको भी जाना है कहीं हमको भी जाना है..

    ….atr

  • मुझको पिलाओ यारो…..

    आज फिर जी भर के मुझको पिलाओ यारो,
    मैं तो झूमा हूँ, मुझे और झुमाओ यारो..
    आज इतनी पिलाओ कि फिर होश न रहे,
    अब तो साकी से मुझे और दिलाओ यारो..
    रात आधी है बंद है मयकदा,
    मेरे जीने के लिए इसको खुलाओ यारो..
    पी पी के मरने में वक़्त लगेगा मुझे;
    आज ही बंद करके मय न जलाओ यारो.

    फिर कभी याद में उसकी न धुआं दिल से उठे ,
    इसलिए दिल में लगी आग बुझाओ यारो…
    आज फिर जी भर के मुझको पिलाओ यारो..

    …atr

  • उनकी उलझी हुई जुल्फ़ें

    उनकी उलझी हुई जुल्फ़ें

    उनकी उलझी हुई जुल्फ़ें जब मेरे शानों पे बिखरती है
    सुलझ सी जाती है मेरी उलझी हुई जिंदगी

  • न उस रात चांदनी होती

    न उस रात चांदनी होती

    न उस रात चांदनी होती
    न वो चांद सा चेहरा दिखता
    न मासूम मोहब्बत होती
    न नादान दिला ताउम्र तडपता

  • मैं तो सन्नाटा हूं

    ये तो मुमकिन नही यूं ही फ़ना हो जाऊं
    मैं तो सन्नाटा हूं फैलूं तो सदा हो जाऊं

  • सलाखें ग़ज़ल गाती हैं

    अब तो उनके घर से सदायें आती हैं ,जो कभी मेरे न थे उनकी भी दुआएं आती हैं …
    सुना है उन मकानों में हज़ारो कत्लखाने हैं , जहाँ दिल चूर होते हैं , सलाखें ग़ज़ल गाती हैं…
    ……

    …atr

  • …पुरानी नजरों से

    उनको हर रोज नये चांद सा नया पाया हमने
    मगर उन्होने हमें देखा वही पुरानी नजरों से

    sign

  • शागिर्द ए शाम

    जब शागिर्द ए शाम तुम हो तो खल्क का ख्याल क्या करें
    जुस्तजु ही नहीं किसी जबाब की तो सवाल क्या करें

    sign

  • कैसे करें शिकवे

    कैसे करें शिकवे गिले हम उनसे
    उनकी हर मासूम खता के हम खिदमतगार है

    sign

  • ये कैसा तसव्वुर, कैसा रब्त

    ये कैसा तसव्वुर, कैसा रब्त, कैसा वक्त है
    जो कभी होता भी नहीं, कभी गुजरता भी नहीं

    रब्तः संबंध

     

New Report

Close