Na hum barbaad hue,
Na hum aabad hue
Jane kaise “janbaaj” hue???
Na hum barbaad hue,
Na hum aabad hue
Jane kaise “janbaaj” hue???
मैं अल्फ़ाज़ हूँ तेरी हर बात समझता हूँ,
मैं एहसास हूँ तेरे जज़्बात समझता हूँ,
कब पूछा मैने की क्यूं दूर हो मुझसे,
मैं दिल रखता हूँ तेरे हलात समझता हूँ…!
ये अल्फाज़ , अल्फ़ाज़ ही नहीं , दिल की ज़ुबानी हैं …..
इन्होंने ज़न्नत को , जो जमीं पर लाने की ठानी हैं …
साथ देने को कई मरतबा भीग जाती हैं पलकें …..
समझों तो यही मोहब्त हैँ , ना समझों तो पानी हैं…..
पंकजोम ” प्रेम “
कल मैंने अपनी प्रेमिका के उतर दिल में ,
चाहत का ज़खीरा देखा …..
अपने जिल्ले – सुभानी के इंतजार में ,
उस चाँद का मायूस चेहरा देखा ..
स्वागत में उसने आब संग बिछा दी पलकें ,
मैंने हर इक आब पर नाम , मेरा देखा …
पंकजोम ” प्रेम ”
अनकही बातों तो समझते आये थे अबतक
उन्होने आज जो कहा समझ नहीं आया
Hum aaj bhi khulii aankhon se sapne dekhte hai…
Band aankh rakh kr aksar insaan peeche reh jaaya krte hai…
Or aankh kholte hi dikhne wale sapne toot jaaya krte hai…
कुछ इस तरह ख्याल उसका, मेरी डायरी में क़ैद रहता है;
.
ღღ___जैसे मेरा वजूद, मेरी शायरी में क़ैद रहता है !!…….#अक्स
Sath rhna humare or b raasta sikhayeinge…
Dosti ki apni daastan sbko sunayeinge…
Pyaar na kr sake to kya hua,
dostii k hr उसूल teh-e-dil se nibhayeinge…
Ek ladki uski aankhon Ki deewani hai…
Pr kya itnii si uske Prem kahaani hai…
मेरे माधव ही नहीं आप सब …
राह – ए – क़ामयाबी में , मेरी तरह एक मुसाफ़िर भी हो ….
भरने फ़लक – ए – क़ामयाबी पर ऊंची उड़ान ……
मेरे संग उड़ने वाले तायर हो …
जिल्ले – सुभानी – ए – अल्फ़ाज़ हो …..
और सुखनवरी की दुनिया के क्या बेहतरीन सुख़नवर हो …. ….
पंकजोम ” प्रेम “….
तायर – पंछी
जिल्ले – सुभानी – सम्राट
सुख़नवर – शायर , कवि
सुखनवरी – शायरी , कविता
देखकर उसकी मुस्कान , ख़ुशी से भर जाता हूँ , मैं …..
उसकी एक झलक पाने ….
कुछ भी कर जाता हूँ , मैं…..
वो क्या जानें , मेरा हाल – ए – दिल ..
उसे मायूस देख …..
ग़ुलाब की पत्तियों की तरह बिखर जाता हूँ , मैं…..
पंकजोम ” प्रेम “
दिल जब कश्ती – ए – मोहब्त पर सवार होता हैँ…..
तब उनसे मुलाकात करने को दिल बेक़रार होता है….
दीदार कर उस अप्सरा का , मैंने भी मान लिया …
” एक नज़र में भी प्यार होता हैं ”
पंकजोम ” प्रेम “
उनकी सुनते सुनते हमारी उम्र निकल गयी
हमारे दिल की न सुनी उन्होने एक भी बार
ღღ___कल मेरी ख़ामोशी का उसकी यादों से, झगड़ा हो गया “साहब”;
.
और शोर इतना हुआ दिल में, कि नींद जागती ही रात भर !!…..#अक्स
जब दर्द हुआ मेरे सीने में ….
तो चुपके से दिल ने कहा …..
ए – सुख़नवर …
” आज थोड़ी तकलीफ़ हो रही हैँ , जीने में “….
पंकजोम ” प्रेम “
_________
लफ़्जों का सहारा बहुत लिया जिंदगीभर मैनें
कभी कोई कंधा भी मिल जाता तो क्या बात होती
– अंजली
_________
meri zindgi se ek jang c chiddi h..
m muskura leti hu..
or
wo rulane pe adi h..
meri zindgi se ek jang c chiddi h.
कई दफ़ा की कोशिश भूल जाने की उन्हे
अब तो भूलने की कोशिशों की भी
यादें बन गयी है|
जैसे ही शरीक हुए , महफ़िल – ए – मय में …..
जाम पर जाम होंठो से टकराते गए…..
हर एक घूंट के साथ …..
हम उनके साथ बिताये हुए , संगीन लम्हें भुलाते गए …..
करामात – ए – मय देखिये , जितना भुलाया था उन्हें…
नशा उतरने के बाद वो उतना ही याद आते रहे…..
पंकजोम ” प्रेम “
मुझे हमेशा तुम से बाँधें रखेँ ….
इस क़ायनात में , ऐसी एक जंजीर ढूंढता हूँ …..
दौलत से सब बन जाते है अमीर …
लेकिन तुझमे मैं , वो दिल वाला अमीर ढूंढता हूँ …..
बांवरा , मगर थोड़ा सयाना बन ….
पार हो जाये तेरे दिल के….
मैं तरकश में , वो मोहब्त का तीर ढूंढता हूँ ….
पंकजोम ” प्रेम “
अकेले होने का यह मरहला मुसलसल है
यहां किसी को किसी का ख्याल कब कुछ है
ए – ख़ुदा …..
जरा तू रौनक – ए – बाज़ार देख….
हर इंसान के चेहरे पर …..
मुस्कराहट का कारवाँ सिलसिलेवार देख …..
जरा एक निगाह , फ़लक पर डाल …..
नजारा – ए – आतिशबाज़ी बार – बार देख …..
Happy Diwali ……
PANKAJ ” prem “
सुख़ , समृद्धि और ख़ुशहाली संग , माँ लक्ष्मी का पूजन हो …
अपनों की , अपनों से , अपनेपन की बढ़ती चले मिठास ….
और दूर सभी उलझन हो …
जब दिखे फ़लक पर , नजारा – ए – आतिशबाज़ी …..
तो हर जन – जन का , आनंदित मन हो….
” सोनी परिवार की और से …
आपको और आपके सभी स्नेहजनों को दीपावली की हार्दिक शुभकामनायें ……”
Pankaj Soni…..
मय में भी नशा है….
लेकिन उस रुख़ – ए – रोशन की ख़ूबसूरती से कम नहीं…
हूँ जब आज , मुस्कुराहट के आगोश में ….
तो दिल कहे ,
अब कोई गम नहीं …
जिस दिन उंगलिया छोड़ दे , क़लम का साथ ….
तो समझ लेना , इस दुनिया में हम नहीं…..
वह रहे कैदे जमां में जो मकीने आम हो
लम्हा लम्हा जीने वालों का मक़ां कोई नहीं
***
उसको हमने कल तडपते हुए देखा था
शायद उसकी यादें कल लोट आयी थी
***
!!!!!! SAGAR KI KALAM SE !!!!!!
Chehre ko nakaab main chupaaye baithe ho
khudh ko khudh se hi chipaaye baithe ho
kab tak bachaate rahoge sachhai se khud ko
ki apne dil main hummi ko samaaye baithe ho
@@ SAGAR @@
5/11/15 :: 1:30 PM …. (630) … ©
!!!!! SAGAR KI KALAM SE !!!!!!
aaj bhi raaton ko karahne ki aawaz
sunaai dete hai iss dil se
jo barso pahle tora diya tha tumne
aaj bhi jinda rakhe hue hun iss dil ko
bari shiddat se
jo barso pahle na jaane kyoun marne
ke liye chor diya tha tumne
@@ SAGAR @@
411/15 :: 8:45 PM … (626) …. ©
!!!!!! SAGAR KI KALAM SE !!!!!
Ek baar kya aajmaya apno ko
ki sabse door hota chala gaya
Bahut be-wafai ki tune mujse e zindagi
ki mai maut ke kareeb hota chala gaya
@@ SAGAR @@
01/11/15 :: 7:40 PM…. (624) … ©
!!!! SAGAR KI KALAM SE !!!!
Likhi thi usne mere hi
zakhm-o-dard par kittaaab apni
idhar mera dard aur barta gaya
udhar uss ki shohrat bharti gayi
@@ SAGAR @@
29/10/15 :: 2:00 PM … (621) … ©
!!!!! SAGAR KI KALAM SE !!!!!
tang ho gayi galiya tere shehar ki
tang ho gaye sab raaste tere dil ke
kaise reh paaunga main ab yahan
mujhe tau aadat hai khuli fizzaaon
main saans lene ki
@@ SAGAR @@
28/10/15 :: 2.34 PM…. (619) …. ©
!!!!! SAGAR KI KALAM SE !!!!
har rang main uska rang nazar aata hai
wo na ho tau har rang be-rang nazar aata hai
humne tau keh diya chand se bhi
ki mera mahboob na ho tau tubhi mujhe kala nazar aata
@@ SAGAR @@
!!!! SAGAR KI KALAM SE !!!!!
kuch iss tarah khaffaa hue wo humse
ki hum duniya se khaffa ho gaye
jab wohi na ho sake hamare
tau hum zindagi se hi juddaa ho gaye
@@ SAGAR @@
27/10/15 :: 7:40 PM…. (617)…. ©
!!!!! SAGAR KI KALAM SE !!!!!
Dil par haath rakhta hun
tau tumhari dharkan sunae deti hai
aankho par haath rakhta hun
tau tumhari surat dekhae deti hai
Kaano par haath rakhta hun
tau tumhari awaaz sunae deti hai
kaise bhula paaunga tumhe main
har shae main teri hi shakshiat dikhaee deti hai
@@ sagar @@
25/10/15 :: 8:00 pm (144)….©
!!!!! SAGAR KI KALAM SE !!!!!
Jab koi dard utthe dil main
tau yaad kar lena
jab koi aah nikle mann se
tau yaad kar lena
mehfil main tau sab honge
tumhare paas apne
jab tanhaaiyon main ghir jaao
tau humme yaad kar lena
@@ SAGAR @@
23/10/15 :: 8:30 PM… (616) … ©
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