Jagmagaaya hai jab khushi ka charaagh

Photex691-1

जगमगाया  है जब खुशी का चराग़

गुल हुआ बज़्मे  बेबसी का चराग़

 

था कभी वजह रोशनी दिल की

वो अमानत है अब किसी का चराग़

 

कोशिश की हैं बारहा  लेकिन

बुझ गया मेरी आशिकी का चराग़

 

दिन निकलते हि छिप गया होगा

सिर्फ़ साथी थ तीरगी  का चराग़

 

राहते दिल सुकून का हासिल

सब से बढ़कर है  बन्दगी  का चराग़

 

ज़ख्म दिल के उभर गयें आरिफ

जल गया शेरो शायरी का चराग़

 

आरिफ जाफरी..

Comments

4 responses to “Jagmagaaya hai jab khushi ka charaagh”

  1. Anirudh sethi Avatar
    Anirudh sethi

    बुझ गया चराग मगर अब क्या
    कौन बुझायेगा ये जो दिल में जल रही है आग….nice ghazal Jafri sahab:)

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