कवि

कवियों की तो बात ही कुछ और है |
सोच की उनका नहीं कोई ठौर है,
मन की गति उनकी , प्रकाश से भी तेज़ है|
दुनिया में उनसे आगे , नहीं कोई विशेष है ||

न जाने कितनी ही तुलनाएँ कर जाते हैं |
कितनी ही उपमाएँ दे जाते हैं,
कभी प्रक्रति को मनुष्य से भाँपते हैं|
तो कभी जीवन के उद्येश्य को विचारते हैं ||

कभी एक तिनके को बलवान बता देते हैं |
कभी सर्वोत्तम को भी निष्फल बता देते हैं,
कभी अंधेरी गुफाओं का भेद देते हैं |
तो कभी मनुष्य के चरित्र को ही भेद देते हैं ||

कभी स्त्री के सम्मान को दर्शाते हैं |
तो कभी पुरषो के अत्याचार को बतलाते हैं,
कभी एक बालक की जिज्ञासा बतलाते हैं |
तो कभी गलत विचारों का भी विरोध कर जाते हैं ||

यही तो कवि के मन की बात है |
हर जगह हर मोड़ पर ,
उनकी सोच में कुछ खास है |
हर किसी से कुछ हटकर ही सोचते हैं ||
तभी तो सभी के दिलों में बसतें हैं |

कभी लोगों की सोच को बदलते हैं कवि,
तो कभी समाज में नया दौर भरतें हैं कवि |
सभी के दिलों का अहम हिस्सा हैं कवि ,
सभी की ज़िंदगी का अहम किस्सा हैं कवि||

Comments

7 responses to “कवि”

  1. Pt, vinay shastri ‘vinaychand’

    बहुत सुन्दर चित्रण
    यथार्थ भाव
    अति उत्तमोत्तम

  2. Virendra sen Avatar
    Virendra sen

    खूबसूरत चित्रण

  3. अच्छी कोशिश

  4. Satish Pandey

    सुन्दर प्रयास

  5. अच्छी प्रस्तुति प्रज्ञा जी

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